पहले शक्ति परीक्षण में नीतीश सरकार पास, पहली बार स्पीकर की कुर्सी पर कमल

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुआई वाली एनडीए सरकार ने विधानसभा में पहला शक्ति परीक्षण जीत लिया। भाजपा के विजय सिन्हा बुधवार को 17वीं बिहार विधानसभा के अध्यक्ष चुन लिए गए। उन्होंने विपक्षी महागठबंधन के प्रत्याशी राजद विधायक अवध बिहारी चौधरी को 12 वोट से हरा दिया। विजय सिन्हा को जहां कुल 243 में से 126 वोट मिले, वहीं विपक्षी उम्मीदवार को 114 ही वोट मिले। मटिहानी से लोजपा के विधायक राजकुमार सिंह ने एनडीए का साथ दिया। राज्य में 51 साल यानी 1969 के बाद स्पीकर पद के लिए चुनाव हुआ। 53 वर्षीय नए स्पीकर विजय सिन्हा लखीसराय से लगातार चौथी बार भाजपा विधायक बने हैं। वह मंत्री भी रह चुके हैं। बिहार में पहली बार कोई भाजपाई विधानसभा अध्यक्ष बना है।

स्पीकर चुने जाने की घोषणा के बाद नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव विजय सिन्हा को आसन तक लेकर गए। विजय सिन्हा ने स्पीकर चुने जाने के बाद सभी विधायकों को धन्यवाद दिया। सदन के प्रति आभार जताया। इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्पीकर चुने जाने के लिए उन्हें बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अध्यक्ष की निष्पक्ष भूमिका होती है। आपको सत्ता और विपक्ष की बातों को सुन नियम के अनुसार काम करना है। आप सदन के सदस्य रहे हैं और मंत्री भी रहे हैं। सबकुछ जानते भी हैं। इसलिए यकीनन आप अपनी भूमिका बेहतरीन तरीके से निभाएंगे। इसके बाद तेजस्वी यादव ने कहा कि अध्यक्ष महोदय, सभी को साथ लेकर आपको चलना है। सदन में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। हम सभी को जनता ने चुना है। उनकी समस्या और प्रश्न का सामाधान सभी को करना है। विपक्ष अलग नहीं होता है, लेकिन आजकल लोकतंत्र की हत्या हो रही है। सच को छुपाया जा रहा है। लेकिन आप आसन के जरिए संविधान को बचाएं और सच का साथ दें।

चुनाव से पहले प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी ने कहा कि क्या सर्वसम्मति से स्पीकर चुनाव का जो प्रस्ताव आया है, उस पर सभी सहमत हैं। इसका तेजस्वी यादव ने विरोध किया। तेजस्वी ने गुप्त मतदान की मांग की, लेकिन उन्होंने इससे इंकार कर दिया। कहा कि इस तरह की परंपरा नहीं रही है। स्पीकर के चुनाव में विपक्ष ने भारी हंगामा किया। विपक्ष ने वोटिंग के दौरान सीएम नीतीश कुमार को सदन से बाहर करने की मांग की। कहा कि वह बिना किसी सदन के सदस्य रहे यहां कैसे बैठ सकते हैं। मंत्री अशोक चौधरी, मुकेश सहनी भी नई सरकार में मंत्री हैं, लेकिन किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। इस पर प्रोटेम स्पीकर ने कहा कि जो किसी सदन के सदस्य नहीं हैं, वे वोट नहीं देंगे। सीएम और मंत्री की हैसियत से बैठे हुए हैं,लेकिन विपक्ष का हंगामा जारी रहा। बाद में नीतीश कुमार खुद कुछ देर के लिए सदन से बाहर चले गए।

एनडीए को दो वोट अधिक मिले-

243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए के पास 125 विधायक हैं। इनमें से जीतनराम मांझी को प्रोटेम स्पीकर के नाते मतदान नहीं करना था। इस तरह एनडीए के खाते में बचे कुल 124 विधायक। लेकिन मिले 126 वोट। यानी एक निर्दलीय विधायक सुमित सिंह का तो वोट मिला ही, लोजपा के एकमात्र विधायक राजकुमार सिंह ने भी विजय सिन्हा के पक्ष में मतदान किया। उधर विपक्षी महागठबंधन के पास 110 विधायक हैं। विपक्षी प्रत्याशी अवध बिहारी चौधरी को इन वोटों के अलावा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के पांच में से चार विधायकों का भी समर्थन मिला। इस तरह उन्हें 114 वोट मिले और वह सत्तारूढ़ एनडीए प्रत्याशी विजय सिन्हा से 12 मतों से चुनाव हार गए।

जदयू के व्हिप से हो गया खेल-

जदयू ने पहले व्हिप जारी नहीं करने का फैसला किया था। उसने इसकी घोषणा भी की थी। इससे विपक्ष को क्रास वोटिंग कराने की मंशा पूरी होती लग रही थी। लेकिन आखिरी समय पर उसने व्हिप जारी कर खेल कर दिया। जबकि भाजपा एक दिन पहले ही विधायकों को हाजिर रहने और विजय सिन्हा के पक्ष में मतदान का व्हिप जारी कर चुकी थी। वैसे अगर जदयू के विधायक नहीं आते और भाजपा का उम्मीदवार हार जाता, तो कहा जाता कि नीतीश ने लोजपा-भाजपा के रिश्तों के विरोध में ऐसा किया। माना जा रहा है कि ऐसे आरोपों से बचने के लिए ही जदयू ने व्हिप जारी किया।

बादपुर गांव के हैं स्पीकर-

पांच जून 1967 को जन्मे विजय कुमार सिन्हा ने इंजीनियरिंग, बीटेक (डिप्लोमा) किया हुआ है। वह मूल रूप से पटना जिले के मोकामा प्रखंड में बादपुर गांव के रहने वाले हैं। पिता शिक्षक थे। चार संतानों में दो बेटे और दो बेटियां हैं। दोनों लड़कियों की शादी हो चुकी है। दोनों दामाद बैंक अधिकारी हैं। बड़ा बेटा इंजीनियर है। छोटा बेटा भी इंजीनियरिंग में पढ़ रहा है। सादगी के प्रतीक विजय सिन्हा पूजा-पाठ के बिना दिन की शुरुआत नहीं होती है। जहां तक राजनीतिक सफर की बात है तो वह पहली बार 2005 में विधायक बने। लेकिन छह बाद ही अक्टूबर 2005 में ही हुए चुनाव में 80 वोट से हार गए। 2010 में फिर विजयी हुए। वह 2015 के बाद 2020 में भी लखीसराय से ही चुनाव जीते। पिछली सरकार में उन्हें 29 जुलाई 2017 श्रम संसाधन विभाग का मंत्री बनाया गया था। वैसे विजय सिन्हा 1980 में बाढ़ नगर में भाजपा से जुड़े और 1992 में पटना महानगर भाजपा के अधीन लोकनायक मंडल के अध्यक्ष बने। 2002 में भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश सचिव, 2004 में प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, फिर 2013 और 2015 में प्रदेश भाजपा प्रवक्ता सहित कई महत्वपूर्ण सांगठनिक पदों पर रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *