बिहार जदयू में अब लव-कुश समीकरण, उमेश कुशवाहा बने प्रदेश अध्यक्ष

पटना। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में अब लव-कुश समीकरण चलेगा। ऐसा विधानसभा चुनाव में कुशवाहा वोट छिटक जाने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए होगा। यही कारण है कि रविवार को जदयू राज्य कार्यकारिणी की बैठक में उमेश कुशवाहा को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया है। यह फैसला इतना अप्रत्याशित था कि खुद उमेश कुशवाहा को सुबह तक कुछ पता नहीं था। इसीलिए वह बैठक में भी नहीं पहुंचे थे। अचानक उन्हें बुलाकर प्रदेश जदयू की कमान सौंप दी गई। वह महनार से विधायक हैं।

इससे पहले खराब सेहत के कारण पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने इस्तीफे की पेशकश की, जिसे स्वीकार कर लिया गया। बाद में उन्होंने ही अपनी जगह उमेश कुशवाहा का नाम बढ़ाया। उमेश कुशवाहा पर भरोसा जताकर नीतीश कुमार ने दरअसल यह स्पष्ट किया है कि वह अपनी आगे की राजनीति फिर से लव-कुश समीकरण के आधार पर करेंगे। बता दें कि खुद नीतीश कुमार और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह जिस जाति से आते हैं, उसे बिहार में लव कहा जाता है। वहीं उमेश कुशवाहा जिस कुर्मी जाति से आते हैं उसे कुश कहा जाता है। कुश यानी कुशवाहा। विधानसभा चुनाव में 28 सीटें कम हो जाने के बाद जदयू को समझ में आ गया है कि पिछड़ी जमात में पैठ कम हो रही है। इसलिए कि कुशवाहा जाति के उसके मंत्रियों तक की हार हो गई। बाद में इस समाज को खुश करने के लिए डॉ. मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्री बनाया भी गया तो घोटाले में नाम होने के कारण एक दिन बाद ही इस्तीफा देना पड़ गया। बता दें कि इस बार चुनाव में जदयू ने 15 कुशवाहा उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से पांच ही जीत पाए। इसी तरह 11 मुस्लिम प्रत्याशियों में से किसी को भी जीत नसीब नहीं हुई।

बदले हालात में खराब सेहत के साथ-साथ जातिगत समीकरणों के लिहाज से भी राजपूत जाति से आने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह बतौर प्रदेश अध्यक्ष पार्टी को अनुकूल नहीं लग रहे थे। इसलिए पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक की कुर्सी पर अपने पुराने वोट बैंक से आने वाले नेताओं को कमान सौंपी है। यही यक्ष प्रश्न खड़ा हो जाता है कि क्या नीतीश कुमार ने वाकई सवर्णों की राजनीति से अलग जाकर केवल लव-कुश समीकरण पर चलने की रणनीति बना ली है? अगर ऐसा हुआ तो उन्हें दूसरे तरह से नुकसान उठाना पड़ सकता है। वैसे सूत्र बताते हैं कि राज्य मंत्रिमंडल में वह सवर्ण नेताओं की संख्या बढ़ा सकते हैं।

विवादित रहे हैं नए प्रदेश अध्यक्ष

जदयू के नए प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा पर हत्या जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं। बता दें कि 13 अगस्त 2018 में जंदाहा प्रखंड प्रमुख मनीष सहनी की हत्या हुई थी। उसमें उमेश कुशवाहा समेत से 11 लोगों पर एफआईआर हुई थ। मनीष सहनी तब उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के जिला सचिव भी थे। मनीष सहनी की हत्या तब हुई थी, जब वह बीडीओ से मिल कर निकल रहे थे। वह 11 दिन पहले ही प्रखंड प्रमुख के लिए चुने गए थे। बहरहाल, इस हत्याकांड में आगे चलकर उमेश कुशवाहा मुक्त कर दिए गए। चुनाव के दौरान दाखिल हलफनामे के मुताबिक, उन्हें इस मामले से बरी कर दिया गया है।

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