दरभंगा में डैमेज कंट्रोल करने में सफल रहे तेजस्वी

दीपक कुमार झा, दरभंगा। बिहार विधानसभा चुनाव में पहले चरण के मतदान के बाद राजद और महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने अपनी रणनीति में थोड़ा बदलाव किया है। वह अब अधिकतर सीटों पर भितरघात और वोटकटवा प्रत्याशियों की मौजूदगी से निपटने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। अधिकतर सीटों पर चौतरफा मुकाबला हो जाने से एक-एक वोट की कीमत बढ़ गई है। इसलिए मंच से वैसे नेताओं का ना सिर्फ सम्मान के साथ नाम लेते हैं, बल्कि चुनाव बाद कुछ विशेष करने का आश्वासन भी दे रहे हैं। इसका असर भी तत्काल देखने को मिल रहा है।

दरभंगा में महागठबंधन के मुख्यमंत्री प्रत्याशी तेजस्वी यादव ने सोमवार को इसी रणनीति के तहत टिकट से वंचित रह गए ओमप्रकाश खेड़िया का पार्टी के प्रति समर्पण और त्याग की सराहना की। इतना ही नहीं, सरकार बनने पर उन्हें उचित सम्मान देने की बात भी अपने भाषण में मुक्त कंठ से कही। उन्होंने कहा कि मिठ्ठू खेड़िया जी ने राजद के लिए जो त्याग किया है, उसे हम व्यर्थ नहीं जाने देंगे। वह ऐतिहासिक राज मैदान में दरभंगा शहर से राजद प्रत्याशी अमरनाथ गामी के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे।

इस मौके पर तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि 15 वर्षों मे इन्होंने मिथिला के लोगों को सिर्फ अंगूठा ही दिखाया है। एक भी कल-कारखाना या रोजगार सृजन का कार्य नहीं किया गया है। बेरोजगारी बढ़ी है। उन्होंने दस लाख नौकरी देने की बात को इस मंच से भी दोहराया। कहा कि हमारी सरकार यदि बनेगी तो कैबिनेट की पहली बैठक में ही दस लाख युवाओं को नौकरी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मिथिला के लोग पढ़ाई, दबाई और कमाई के लिए पलायन करते हैं। इसलिए इस बार चुनाव का मुद्दा भी पढ़ाई, कमाई, दबाई, सिंचाई, और महंगाई है। इससे पूर्व सभा को संबोधित करते हुए पार्टी के पूर्व प्रत्याशी और पूर्व महापौर ओमप्रकाश खेड़िया उर्फ मिट्ठू खेड़िया, महापौर वैजयंती खेड़िया ने भी लोगों से लालटेन पर बटन दबा कर अमरनाथ गामी को भारी मतों से विजयी बनाने की अपील की। बता दें कि दरभंगा शहर से ओमप्रकाश खेड़िया उर्फ मिट्ठू खेड़िया राजद से टिकत के प्रमुख दावेदार थे। लेकिन अंतिम समय में जदयू से आए अमरनाथ गामी को लालटेन चुनाव चिह्न दे दिया गया। इससे खेड़िया के समर्थक नाराज हो गए थे। उन्होंने कई बैठकें कर अपनी नाराजगी से पार्टी नेतृत्व को अवगत भी करा दिया था। ऐसे में पिछले दिनों बद्री पूर्वे जैसे सशक्त नेता के राजद छोड़ देने के बाद खेड़िया की नाराजगी से नुकसान का अंदेशा हो रहा था। लेकिन सोमवार को मंच से जिस तरह खेड़िया का नाम लिया गया और खुद खेड़िया ने भी जिस तरह का भाषण दिया, उससे लगता है कि दरभंगा में डैमेज कंट्रोल करने में तेजस्वी सफल रहे।

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