समझदार सुशील मोदी को तीन गलतियां पड़ीं भारी

आर्यांश, पटना। जिस तरह की तीन गलतियां समझदारों से होती हैं, वैसी ही बिहार में भाजपा नेता सुशील मोदी से हो गई। इसका खामियाजा उन्हें बिहार की राजनीति से बाहर होकर भुगतना पड़ रहा है। बिहार में 11 वर्षों तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के डिप्टी रहे सुशील मोदी अब केंद्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन के डिप्टी हो सकते हैं। वहां से हिमाचल प्रदेश के भाजपा नेता अनुराग ठाकुर को कहीं और शिफ्ट किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, इसकी इच्छा वह काफी समय से जता भी रहे थे। हालांकि, दूसरे सूत्र दोनों के लिए दूसरे विकल्प की बात कर रहे हैं। यानी सुशील मोदी को जहां खुश करने के लिए स्वतंत्र रूप से कोई बड़ा मंत्रालय दिया जा सकता है, वहीं अनुराग ठाकुर सरकार से बाहर होकर संगठन में जा सकते हैं। सुशील मोदी के साथ मध्य प्रदेश से ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में एडजस्ट किया जाएगा। वैसे किसी का कुछ भी हो, सुशील मोदी की दिवाली तो इस बार काली हो ही गई। दीपावली पर लोगों के शुभकामना संदेश की चर्चा होती है, जबकि बिहार में सुशील मोदी के दर्दभरे ट्वीट की चर्चा रही। साथ ही नेतृत्व के लिए यह तंज कि कार्यकर्ता का पद कोई नहीं छीन सकता।

सुशील मोदी से तीन गलतियां इस तरह हुईं। पहली तो यह कि जब पिछले साल उनके समान वैश्य बिरादरी के डॉ. संजय जयसवाल को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाया गया तो इसके निहितार्थ को नजरअंदाज कर दिया। जबकि इसका सीधा और सरल मतलब था कि पार्टी को राज्य में एक म्यान में दो तलवारें नहीं रखनी है। प्रदेश स्तरीय जनाधार नहीं होने के बावजूद डॉ. संजय जायसवाल को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया ही गया था एक तीर से दो निशाने साधने के लिए। इस कदम से एक तो प्रदेश भाजपा में एकछत्र राज करते चले आने वाले सुशील मोदी से इकलौते वैश्य नेता होने का तमगा छीनने का प्रयास किया गया। दूसरे, वर्षों से मोदी की एकतरफा कार्यप्रणाली से पैदा हो गई जड़ता को तोड़ने की कोशिश भी की गई। पिछला विधानसभा चुनाव गवाह था कि सुशील मोदी और दूसरे वरिष्ठ नेता नंदकिशोर यादव की छवि नीतीश समर्थक की इतनी पुख्ता हो गई थी कि उनके विरोध में पैनापन आ ही नहीं सका। इससे अकेले चुनाव लड़ने उतरी भाजपा विधानसभा में तीसरे नंबर पर पहुंच गई। 2015 का चुनाव अकेले लड़ने का फैसला अमित शाह का था। उन्हें कभी भी और कहीं भी स्टेपनी बनकर रहना कुबूल नहीं होता। परिणाम विपरीत आने के बाद हालांकि सुशील मोदी छात्र जीवन से मित्रता निभाने वाले नीतीश कुमार को 2017 में महागंठबन से तोड़ कर वापस एनडीए में ले आए, लेकिन बात तो स्टेपनी वाली ही रह गई।

दूसरी गलती, इस बार के चुनाव में हो गई। चिराग पासवान की पार्टी लोजपा को लेकर। यह जानते हुए भी कि जदयू के खिलाफ लोजपा वाली रणनीति भाजपा में सबसे प्रभावशाली गुट की ओर से तैयार की गई है, सुशील मोदी लगातार चिराग को निशाना बनाते रहे। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के इस प्रभावशाली गुट ने इसे बेअदबी माना। यह भी कि ऐसा उन्होंने नीतीश कुमार के कहने पर किया। जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ही लोजपा को लेकर आक्रामक थे, तब सुशील मोदी को चिराग को लेकर इतना कटु नहीं बनना चाहिए था। इससे मतदाताओं में भ्रम फैला। जदयू के खिलाफ 115 सीटों पर उतरी लोजपा को उम्मीद के विपरीत सिर्फ एक सीट जीतने में सफलता मिली। जबकि प्लान यह था कि लोजपा किसी तरह 15-20 सीट भी जीत ले और उसकी मदद से भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर मुख्यमंत्री पद पर दावा कर दे। चिराग तब इस पर अड़ जाते कि उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार पसंद नहीं हैं। मजबूरी में नीतीश को सरेंडर करना पड़ता। लेकिन हो गया सब उलटा। एनडीए में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद भाजपा फिर स्टेपनी बनकर रह गई।

तीसरी गलती ताजा-ताजा हुई है। पिछली दो गलतियों से सबक नहीं लेते हुए उन्होंने चुनाव परिणाम आते ही अपने बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं की। पार्टी नेतृत्व की ओर से बहुत दिनों से दिए जा रहे संकेतों को दरकिनार कर इस बार भी वह नीतीश कुमार की सरकार बनाने में जुट गए थे। बताया जाता है कि जब दो उपमुख्यमंत्री बनाने और इसके लिए नित्यानंद राय के साथ गिरिराज सिंह के नामों की चर्चा शुरू ही हुई थी कि वह नीतीश कुमार के दूत के तौर पर पार्टी नेतृत्व को समझाने लगे थे। बताया तो यहां तक जाता है कि जब भाजपा में दूसरी पंक्ति के नेताओं की ओर से अधिक सीटों के आधार पर सीएम पद की मांग की जाने लगी तो फिर नीतीश की कथित धमकी ऊपर तक पहुंचा दी गई। यह समझाया गया कि ऐसे में नीतीश अपनी पार्टी जदयू को लेकर विपक्ष में बैठने जा रहे हैं। इससे पहली पंक्ति के नेताओं ने जोर-जोर से तत्काल यह कहना शुरू कर दिया कि नीतीश ही हमारे मुख्यमंत्री होंगे। और, अंत के ट्वीट का तो कहना ही क्या। इसमें ऐसा तीर चुभोया गया है कि सुशील मोदी राज्य और केंद्र के बीच अधर में भी लटक सकते हैं।

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