राजद ने मित्र दलों को सौ सीटें देकर सीएम पद की दावेदारी फंसा ली

अभिषेक, पटना। कई तरह के विवादों के बाद शनिवार की शाम विपक्षी महागठबंधन में सहमति की गांठ लग ही गई। महागठबंधन का नेतृत्व तेजस्वी यादव ही करेंगे। पटना के एक बड़े होटल में सीटों के बंटवारे को लेकर औपचारिक घोषणा कर दी गई। शाम तक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की अगुआई वाले महागठबंधन में कांग्रेस, माकपा, भाकपा, भाकपा (माले), विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी), झारखंड की सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के नाम थे। लेकिन सीट बंटवारे में अपनाए गए अंकगणित से वीआईपी नेता मुकेश सहनी सहमत नहीं हुए। उन्होंने नाराजगी न छिपाते हुए महागठबंधन से अलग होने की घोषणा की और प्रेस कांफ्रेंस का ही बायकाट कर दिया। बिहार विधानसभा में 243 सीटें हैं। फैसले के मुताबिक, राजद को 144, कांग्रेस  को 70, भाकपा (माले) को 19, भाकपा को छह और माकपा को चार सीटें दी गई हैं। कांग्रेस को वाल्मीकिनगर में हो रहे लोकसभा उपचुनाव लड़ने की अनुमति दी गई है।  मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी और झारखंड मुक्ति मोर्चा को राजद अपने हिस्से की सीट देगा। यानी राजद को मिली कुल 144 सीटों में और कमी हो सकती है। हालांकि वीआईपी के अलग हो जाने और झारखंड मुक्ति मोर्चा के अंत में चुनाव न लड़ने की संभावनाओं को देखते हुए 144 सीटें रह ही जाएंगीं।

इस बंटवारे में सबसे अधिक फायदे में कांग्रेस रही। दबाव की रणनीति सफल रहने से उसके हिस्से 70 सीटें आ गईं। लेकिन राजद के लिए यह अनुकूल स्थिति नहीं मानी जा सकती है। चुनाव बाद राज्य में किसी भी गठबंधन का मुख्यमंत्री वही बन सकता है, जिसके पास सौ से ऊपर विधायक होंगे। जब राजद चुनाव ही लगभग 144 सीटों पर लड़ेगा तो सौ से ऊपर विधायक जीतकर कैसे पहुंच सकते हैं? ऐसे में जब विपक्ष के पक्ष में कोई लहर भी नहीं है। उलटे विपक्षी एका पर ही सवालिया निशान है। सूत्रों के मुताबिक, कौन किस सीट से लड़ेगा, यह फैसला बाद में किया जाएगा। अभी इस पर पेच फंसा हुआ है। बता दें कि 2015 में राजद 100 सीटों पर, जबकि कांग्रेस 43 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इनमें राजद ने 80 तो कांग्रेस ने 27 सीटें पर जीत दर्ज की थी। लेकिन तब नीतीश कुमार की पार्टी जदयू भी इस गठबंधन में था।

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तेजप्रताप की तबीयत बिगड़ने देर से पहुंचे तेजस्वी

दिन में बड़े भाई तेजप्रताप की तबीयत बिगड़ जाने के कारण तेजस्वी प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगभग एक घंटे की देर से पहुंचे। तेजप्रताप अपने घर में बेहोश होकर गिर गए थे। इसके बाद राबड़ी देवी और तेजस्वी उन्हें अपने घर ले गए थे। पत्रकारों से बातचीत में तेजस्वी ने कहा कि हमारे कुछ साथियों को एनडीए को हराने के लिए कुर्बानी देनी पड़ी है। हम उनकी कुर्बानी की रक्षा करेंगे।  उन्होंने दावा किया कि  महागठबंधन में शामिल दलों ने उनके नेतृत्व पर विश्वास किया है। वह सभी के विश्वास पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। उन्होंने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार आईसीयू में है। नीतीश सरकार गरीबी-भुखमरी को हटा नहीं पाई। गरीबों पर लाठी चलवाई है। उन्होंने दोहराया- हम ठेठ बिहारी हैं। जो वादा करते हैं, उसे पूरा करते हैं। हमारा डीएनए पूरी तरह शुद्ध है। हम बिहार को शुद्ध जल की तरह बढ़िया विकल्प देंगे। हम पहली कैबिनेट में पहली कलम से 10 लाख स्थायी और सरकारी नौकरी देंगे। नौकरी के लिए आवेदन भरने की फीस भी नहीं लगेगी।

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