नीतीश की जगह आरसीपी सिंह बने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष

पटना। जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) के चाणक्य कहे जाने वाले आरसीपी सिंह यानी रामचंद्र प्रसाद सिंह को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। यह फैसला रविवार को पटना में चल रही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया। इसके पहले बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने का एलान किया। कहा कि वह बिहार चुनाव में पार्टी के हार की जिम्मेवारी लेते हैं। साथ ही मुख्यमंत्री की जिम्मेवारी होने के कारण वह पार्टी को समय नहीं दे पा रहे हैं। पार्टी को आगे ले जाने के लिए जदयू को फुल टाइम अध्यक्ष की जरूरत है। फुल टाइम अध्यक्ष ही पार्टी को बिहार में तीसरे नंबर की पार्टी से पहले नंबर की पार्टी बना सकता है। इसके बाद खुद उन्होंने आरसीपी सिंह को अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया, जिसे सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया गया।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार ने कहा कि आरसीपी सिंह संगठन का काम काफी पहले से देख रहे हैं। वह संगठन महासचिव का पद भी संभाल रहे हैं। लिहाजा उन्हें अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव है। नीतीश कुमार के इस प्रस्ताव पर सभी ने हामी भरी और यह तय हो गया कि आरसीपी सिंह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे। नीतीश कुमार ने कहा कि आरसीपी सिंह के नेतृत्व में पार्टी और आगे बढ़ेगी। मैं तो मुख्यमंत्री भी नहीं बनना चाहता था, लेकिन लोगों ने कहा तो मैंने यह पदभार संभाल लिया। बता दें कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद राष्ट्रीय परिषद की बैठक हुई। उसमें आरसीपी सिंह को अध्यक्ष बनाने का औपचारिक प्रस्ताव लाया गया, जिसे मंजूर करने की औपचारिकता निभायी गई। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद आरसीपी सिंह ने कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी को अच्छे से निभाएंगे। साथ ही इशारों में बीजेपी को संदेश भी दिया कि हम पूरी ईमानदारी के साथ रहते हैं। कहा-बिहार चुनाव में सहयोगी का वोट जदयू में ट्रांसफर नहीं हुआ, लेकिन हमारा वोट उनमें ट्रांसफर हुआ। इसलिए उनकी सीटें बढ़ गईं। यह भी कहा कि हम साजिश नहीं रचते, किसी को धोखा नहीं देते हैं। लेकिन हमारे संस्कार को कमजोरी ना समझें, हमारा संस्कार बहुत मजबूत है। कोई हिला नहीं सकता है।
पूर्व आईएएस अधिकारी और राज्यसभा के सदस्य आरसीपी सिंह को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सबसे करीबी माना जाता है। अच्छे दोस्त ही नहीं, बल्कि उनके बड़े सियासी सलाहकारों में भी हैं। हालांकि, आरसीपी सिंह ज्यादा सुर्खियों में रहना पसंद नहीं करते हैं। कहा जाता है कि शायद ही ऐसा कोई फैसला हो, जो नीतीश कुमार ने बिना आरसीपी सिंह की सलाह के लिया हो। आरसीपी सिंह सिर्फ नीतीश कुमार के राजनीतिक, रणनीतिकार और सियासी सलाहकार ही नहीं, बल्कि उन्हीं के कुर्मी समुदाय से आते हैं। गृह जिला भी वही नालंदा है। उनका जन्म नालंदा जिले के मुस्तफापुर में 6 जुलाई 1958 को हुआ। पिता का नाम स्वर्गीय सुखदेव नारायण सिंह था। माता का नाम दुख लालो देवी। शुरुआती शिक्षा नालंदा जिले में ही हुसैनपुर हाइस्कूल में हुई। फिर पटना साइंस कॉलेज से पढ़ाई की। बाद में जेएनयू में पढ़ने के लिए चले गए। राजनीति में आने से पहले वह उत्तर प्रदेश कैडर से आईएएस अफसर रहे। वह रामपुर, बाराबंकी, हमीरपुर और फतेहपुर के जिलाधिकारी रहे। इसी दौरान वह समाजवादी पार्टी के नेता रहे बेनी प्रसाद वर्मा के करीब पहुंचे। बेनी प्रसाद वर्मा जब केंद्रीय संचार मंत्री थे, तो आरसीपी सिंह उनके निजी सचिव थे। इसके बाद नीतीश कुमार जब रेल मंत्री बने तो बेनी प्रसाद वर्मा ने उनसे आरसीपी सिंह का परिचय कराया। वर्मा जी के कहने पर ही नीतीश कुमार ने उन्हें अपना निजी सचिव बना लिया था। फिर जब वह मुख्यमंत्री बने तो आरसीपी को अपना प्रधान सचिव बनाया। फिर उन्हें राजनीति में ले आए। अब जदयू की ओर से राज्यसभा का सदस्य हैं।

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