नीतीश को बीजेपी से मिल गई मंत्रिमंडल विस्तार की मंजूरी

पटना। बिहार में दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार मकर संक्रांति के बाद होगा। बीजेपी ने इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हरी झंडी दे दी। इसके लिए जदयू नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव से बात करनी पड़ी। सूत्रों के मुताबिक, दोनों के बीच हुई बातचीत में मंत्रिमंडल विस्तार के अलावा विधान परिषद की दो सीटों पर उपचुनाव और 12 एमएलसी के मनोनयन का मामला भी सुलझ गया है। भूपेंद्र यादव यूं तो घोषित तौर पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद की मां के श्राद्ध में शामिल होने पटना आए थे, लेकिन असली मकसद एनडीए में चल रहे गतिरोध को खत्म करना ही था। बता दें कि विधानसभा चुनाव के बाद से बिहार बीजेपी के प्रभारी भूपेंद्र यादव गुरुवार को पहली बार पहली बार नीतीश कुमार से मिले। वह इससे पहले जब पटना आए थे, तो मुख्यमंत्री से मिले बगैर दिल्ली लौट गए थे।

बिहार बीजेपी के प्रभारी भूपेंद्र यादव की नीतीश कुमार और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह के साथ लंबी बैठक हुई। इसमें मंत्रिमंडल विस्तार पर फैसला हो गया। बीजेपी पहले विधानसभा सीटों के हिसाब से मंत्रियों का कोटा चाहती थी। लेकिन नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के लिए थोडी छूट ले ली। इस तरह अब विधानसभा में 43 ही विधायक होते हुए भी दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार में जदयू के मंत्री अधिक बनेंगे। इस छूट में बड़ा सियासी संकेत है। गौरतलब है कि कांग्रेस के 14 विधायकों के पार्टी छोड़ने और एनडीए में शामिल होने की चर्चा है। ऐसे में उनमें से अधिकतर को मंत्री बनाना मुख्यमंत्री की मजबूरी होगी। इसलिए उन्हें जदयू कोटे से मंत्रियों की संख्या बढ़ानी ही होगी। इससे यह भी साफ हो रहा है कि दूसरी पार्टियों से आने वाले विधायक जदयू में ही शामिल होंगे। उधर, बीजेपी कोटे से बनने वाले मंत्रियों की सूची भी लगभग तैयार हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, इसमें पूर्व मंत्री और बीजेपी के दिग्गज नेता प्रेम कुमार और नंदकिशोर यादव के नाम नहीं हैं। बीजेपी कोटे से अधिकतर नई पीढ़ी के नेता होंगे।

बैठक में एमएलसी के दो सीटों पर उपचुनाव और राज्यपाल कोटे से 12 विधान पार्षदों के मनोनयन पर भी सहमति बन गई। विधान परिषद की जिन दो सीटों पर उपचुनाव हो रहा है, वे दोनों बीजेपी की हैं। ये सीटें पहले राज्यसभा चले गए सुशील मोदी और विधायक बन गए पूर्व मंत्री विनोद नारायण झा की थीं। लेकिन बीजेपी नीतीश की जरूरत को देखते हुए एक सीट जदयू को देने के लिए मान गई है। इसके बदले बीजेपी ने राज्यपाल कोटे से मनोनयन वाली सीटों में सात मांग ली है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी-जेडीयू में 7-5 के फार्मूले पर बात बन गई है।

बहरहाल, गुरुवार की सुबह पटना पहुंचे भूपेंद्र यादव पहले जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने आरसीपी सिंह से जाकर मिले थे। कहने को वह आरसीपी सिंह को बधाई देने के लिए जदयू के ऑफिस में गए थे। लेकिन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल के साथ पहुंचे भूपेंद्र यादव ने बंद कमरे में आरसीपी सिंह के साथ लंबी बातचीत की। इस बातचीत में ही तमाम विवादित मुद्दों को सुलझाने का प्रयास किया गया। बाद में नीतीश कुमार के साथ हुई बातचीत में सहमतियों पर मुहर भी ले ली गई। मुख्यमंत्री के घर पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल के साथ दोनों डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद और रेणू देवी भी थीं। इस बीच, एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की घटना पर हम अब दुखी नहीं हैं। गौरतलब है कि वहां जदयू के छह विधायकों को तोड़कर बीजेपी ने अपने में शामिल कर लिया है।

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