सातवीं बार सत्ता संभालेंगे सुशासन बाबू

पटना। बिहार की जनता ने नीतीश कुमार के नेतृत्व पर फिर भरोसा जता दिया है। 15 वर्ष के सुशासन को पांच साल के लिए फिर जनादेश दे दिया है। इस जीत के साथ नीतीश कुमार सातवीं बार मुख्यमंत्री की शपथ लेंगे। बता दें कि जदयू नेता नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए को विधानसभा की 243 में से 125 सीटें मिली हैं। राजद नेता तेजस्वी यादव की अगुआई वाला महागठबंधन 110 सीटें ही जीतने में सफल रहा। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआइएमआइएम को पांच, बसपा को एक और अन्य को दो सीटें मिली हैं। एनडीए में सबसे अधिक 74 सीटें भाजपा को मिली हैं। जदयू की झोली में 43 सीटें ही आईं। इस तरह एनडीए में जहां भाजपा बड़े भाई की भूमिका में आ गई, वहीं जदयू को छोटा भाई बनकर रहना पड़ेगा। इसका असर नई सरकार में मंत्रियों की संख्या पर भी पड़ेगा। उधर विपक्षी महागठबंधन में सबसे अधिक 75 सीटें राजद को मिलीं। कांग्रेस 19 सीटें जीतकर चौथे स्थान पर बनी रही। पिछली बार तीन ही सीटें जीतने वाली भाकपा (माले) अबकी आश्चर्यजनक तरीके से 12 पर पहुंच गई है।

बिहार में सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बनने वाले नीतीश कुमार ने 2005 के बाद अपने हाथ से सत्ता की बागड़ोर कभी जाने नहीं दी। तब उन्होंने राजद से सत्ता छीनी थी। वैसे पहली बार नीतीश कुमार 2000 में मुख्यमंतरी बने थे, लेकिन बहुमत साबित कर पाने से कुछ ही दिनों में उनकी सरकार गिर गई थी। इसके बाद 24 नवंबर 2005 को वह फिर मुख्यमंत्री बने। इसके बाद बतौर मुख्यमंत्री उनका सफर नहीं रुका। पांच साल तक सफल राज के बाद वह 2010 में तीसरी बार सीएम बने। लेकिन 2014 में लोकसभा चुनाव में हुई हार के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया औ। इससे राज्य के राजनीतिक सम्मीकरण बदल गए और नीतीश कुमार भाजपा से अलग होकर विपक्षी महागठबंधन में शामिल हो गए। 2015 के विधानसभा चुनाव में राजद और कांग्रेस के साथ उनकी फिर जीत हुई। इससे वह 20 नवंबर 2015 को पांचवीं बार मुख्यमंत्री बने। दो साल तक महागठबंधन में रहने के बाद नीतीश ने अचानक राजद से संबंध तोड़ लिया। मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। लेकिन इसके अगले ही दिन वह फिर भाजपा की मदद से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे थे। इस तरह 27 जुलाई 2017 को उन्होंने छठी बार सीएम पद की शपथ ली। अब 2020 में भले ही एनडीए में नीतीश कुमार की पार्टी का कद छोटे भाई की हो गई हो, पर बीजेपी ने उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाने का एलान कर दिया है। इस तरह बतौर सीएम उनकी यह सातवीं पारी होगी।

अगर इस बार के नतीजों की क्षेत्रवार समीक्षा करें तो चिराग पासवान की लोजपा द्वारा लगभग 50 सीटों पर काफी वोट काट लेने से दोनों गठबंधनों में काटी की लड़ाई हो गई थी। इस चुनाव में यह भी साफ हो गया कि प्रचारों में दिख रही भीड़ के बावजूद राजद नेता तेजस्वी यादव के पक्ष में कोई लहर नहीं थी। अगर होती तो राजद की ही सीटें पिछली बार से कम नहीं हो जातीं। 2015 में 80 सीटें जीतने वाली राजद के हिस्से इस बार 75 सीटें आईं। 70 सीटों पर लड़ने वाली सहयोगी कांग्रेस की भी सीटें कम होकर 19 रह गईं, जबकि पिछली बार उसके 27 विधायक थे। फिर भी नतीजों को देखें तो बक्सर की सभी चार और औरंगाबाद की सभी छह सीटों पर विपक्षी महागठबंधन विजयी रहा। किशनगंज की चार सीटों में महागठबंधन को दो और अन्य के खाते में दो सीटें गईं। गोपालगंज की छह में चार सीटें जहां एनडीए को मिलीं, वहीं दो महागठबंधन को। अररिया की छह में से चार एनडीए को तो एक-एक महागठबंधन और अन्य को मिली। भागलपुर की सात में से पांच सीटें जहां एनडीए के खाते में गईं, वहीं दो सीटें महागठबंधन को भी मिलीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालांदा की सात में से छह सीटें एनडीए को मिली हैं। एक सीट राजद को। कटिहार की सात में से चार एनडीए को तो तीन महागठबंधन के खाते में गईं। रोहतास की सभी सात सीटें महागठबंधन के पक्ष में गईं। उधर, सीतामढ़ी की आठ में से छह सीटें एनडीए ने हासिल की, जबकि महागठबंधन को दो सीटों से संतोष करना पड़ा। लेकिन सीवान की आठ में से महागठबंधन ने छह सीटें जीतकर क्षेत्र पर पकड़ फिर साबित की। पूरी ताकत लगाने के बाद भी एनडीए को दो सीटों से ही संतोष करना पड़ा। पूर्वी चंपारण में एनडीए गढ़ बचाने में सफल रहा। वहां 12 सीटों में से नौ पर जीत मिली, जबकि महागठबंधन तीन ही जीत पाया। वैशाली की आठ सीटें दोनों गठबंधनों के बीच चार-चार में बंट गई। समस्तीपुर और गया में

के नौ मंत्री बड़े अंतर से हारे-

इस चुनाव में नीतीश कुमार के नौ मंत्री हार गए। वह भी वोटों के बड़े अंतर से। ये हैं-जहानाबाद से जदयू कृष्ण नंदन वर्मा, राजपुर से संतोष कुमार निराला, जमालपुर से शैलेंद्र कुमार,चैनपुर से बृजकिशोर बिंद (भाजपा), दिनारा से जय कुमार सिंह, सिकटा से खुर्शीद उर्फ फिरोज, सिंहेश्वर से रमेश ऋषिदेव, मुजफ्फरपुर से सुरेश शर्मा (भाजपा) और हथुआ से रामसेवक सिंह।

विधानसभा की स्थिति

कुल सीटें : 243

बहुमत के लिए चाहिए : 122

किसके पास कितनी सीटें

भाजपा : 74

जदयू : 43

हम : 4

वीआइपी : 4

कुल : 125

महागठबंधन

राजद : 75

कांग्रेस : 19

भाकपा : 2

माकपा : 2

माले : 12

कुल : 110

अन्य : 8

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