शुभ मंगल, सावधान! 28 दिन बाद हो रही है नीतीश मंत्रिमंडल की मीटिंग

आर्यांश, पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 28 दिनों के बाद मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है। शाम साढ़े चार बजे इस कैबिनेट बैठक में कई बड़े और जनहित वाले फैसले हो सकते हैं। खासकर बेलगाम अपराधियों पर नकेल कसने को लेकर। वैसे सरकार के भीतर महीने भर चली खींच-तान के मद्देनजर भी इस बैठक का महत्व बढ़ गया है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने यह फैसला भाजपा की ओर से नए मंत्रियों की सूची मिल जाने के बाद किया है। बता दें कि इस सिलसिले में सोमवार को वैशाली में भाजपा की कोर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें पार्टी के चारों मंत्री-संजीव चौरसिया, देवेश कुमार, जनकराज और सुशील चौधरी शामिल थे। इनके अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ.संजय जायसवाल और नागेंद्र जी के अलावा विशेष आमंत्रित के तौर पर पीएल संतोष भी थे। बताया जाता है कि इस बैठक में केंद्रीय नेतृत्व से अनुमति के बाद नीतीश मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नए मंत्रियों के नाम तय कर दिए गए।

यूं तो कैबिनेट बैठक हर मंगलवार को होते रहने की परंपरा रही है। लेकिन नई सरकार में ऐसा नहीं होने पाने से राज्य में तमाम सरकारी काम ठप पड़ गए थे। बल्कि इस सरकार में अब तक एकमात्र कैबिनेट बैठक 17 नवंबर को हुई थी। वह भी इसलिए कि 16 नवंबर को नए मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण के बाद विधानमंडल का सत्र बुलाने का फैसला लेना था। तब सत्तारूढ़ एनडीए में तय हुआ था कि जल्द ही कैबिनेट का विस्तार कर नए मंत्रियों को शामिल कर लिया जाएगा। नीतीश कुमार 27 नवंबर को विधानमंडल का सत्र समाप्त होने के बाद 29 को कैबिनेट का विस्तार करना चाहते थे। लेकिन भाजपा में दो पीढ़ियों के नेताओं में मतभेद हो जाने से सूची बन ही नहीं पाई। इससे कैबिनेट का विस्तार नहीं हो सका। अब मंगलवार को इस बारे में भी महत्वपूर्ण घोषणा हो सकती है। बता दें विधानसभा में इस बार संख्या बल के कारण छोटे और बडे भाई का समीकरण बदल गया है। दोनों को ऐसी भूमिका की आदत नहीं है। लिहाजा जिस-तिस मसले पर पेंच फंस जा रहा है। पहली बार छोटे भाई से बड़े भाई की भूमिका में आई भाजपा के नेताओं का पेट भी अबकी बड़ा हो गया है। लिहाजा उन्हें अधिक मंत्री ही नहीं चाहिए, बल्कि महत्वपूर्ण विभागों पर भी दावा है। शायद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इसका अंदेशा पहले से था। इसीलिए पिछली सरकार में जदयू के मंत्रियों के पास रहे अधिकतर बड़े विभाग उन्होंने अपने पास ही रख लिया था। ये विभाग मंत्रिमंडल विस्तार के बाद जदयू के कोटे से बने मंत्रियों को ही दिए जाएंगे। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, पार्टी चाहती है कि उसे शिक्षा, जल संसाधन और ग्रामीण कार्य विभागों में से कम से कम दो विभाग जरूर मिले। इसलिए कि कामकाज के लिए लिहाज से गृह और सामान्य प्रशासन जैसा सबसे महत्वपूर्ण विभाग इस बार भी नीतीश कुमार के पास ही है।

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