इशारों में बोल गए नीतीश- भाजपा से तालमेल में कमी

नई दिल्ली। बिहार में नीतीश कुमार की अगुआई में एनडीए की नई सरकार को बने एक महीना पूरा हो गया। इन 30 दिनों में गठबंधन के भीतर से जितनी बातें निकलीं, वे 36 तरह की। 16 नवंबर को मुख्यमंत्री की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार ने भी गठबंधन को लेकर तीसवें दिन मुंह खोला। जो बोला, उससे यह और पुख्ता हुआ कि सरकार के अंदर सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। कैबिनेट विस्तार का इंतजार इतना लंबा खिंच गया है कि कई तरह की अटकलें चल पड़ीं। इस देरी के लिए उन्होंने सीधे-सीधे भाजपा को दोषी ठहरा दिया। कहा-भाजपा इस बारे में कोई चर्चा नहीं कर रही है। यह भी कि मंत्रिमंडल के विस्तार में उन्हें कोई फैसला नहीं लेना है। इसके लिए भाजपा को निर्णय लेना है। वह पटना एयरपोर्ट के निरीक्षण के दौरान पत्रकारों से बात कर रहे थे।

मुख्यमंत्री का यह बयान बताता है कि विधानसभा में संख्या बल में कमजोर पड़ जाने से वह कितने लाचार हो गए हैं। दूसरे, यह सुशील मोदी के सरकार से बाहर हो जाने के बाद भाजपा और जदयू में तालमेल टूट जाने को भी दर्शाता है। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान पर भाजपा ने कहा कि मंत्रिमंडल का विस्तार मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है। पार्टी प्रवक्ता संजय टाइगर ने कहा है कि भाजपा संवाद और समन्वय में विश्वास करती है। हमारी और से इसमें कतई कोई कमी नहीं है। साथ ही जोड़ा कि तमाम मित्र दलों से बातचीत करने के बाद ही मुख्यमंत्री कैबिनेट का विस्तार करेंगे।

बता दें कि 16 नवंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कुल 14 मंत्रियों के साथ शपथ ली थी। इनमें भाजपा के कोटे से सात, जदयू के पांच, मांझी और मुकेश सहनी की पार्टी से एक-एक चेहरे को जगह मिली थी। बाद में जदयू के मंत्री मेवालाल चौधरी ने इस्तीफा दे दिया। इस तरह अब नीतीश कुमार के अलावे कैबिनेट में 13 ही मंत्री बचे हैं। ऐसे में 27 नवंबर को विधानसभा के पहले सत्र की समाप्ति के बाद ही कैबिनेट का विस्तार होना था। सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार ने जदयू कोटे के नए मंत्रियों की सूची बनाकर तभी से बैठे हैं। वह तो भाजपा है, जो सरकार के बजाय अपने संगठन के भीतर के गुणा-भाग से मुक्त ही नहीं पा रही है। ऐसे में जदयू का सत्ता का गणित गड़बड़ा रहा। इस एक महीने में ना तो मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ और ना ही राज्यपाल कोटे से एमएलसी मनोनयन ही पाया। ऐसा हुआ सत्तारूढ़ एनडीए के दो प्रमुख घटक दलों में तालमेल नहीं हो पाने से। ऐसी बातें तब नहीं होती थीं जब सुशील मोदी उप मुख्यमंत्री हुआ करते थे।

भाजपा की गोपनीय बैठक, सीएम का दौरा

मंगलवार को एक और संयोग हुआ। वैशाली में जब भाजपा की कोर कमेटी भावी योजनाओं को लेकर गोपनीय बैठक कर रही थी, तभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शहर में पहुंच गए। हालांकि जाहिर तौर पर वह वैशाली में बुद्ध स्मृति स्तूप और बुद्ध सम्यकदर्शन संग्रहालय के निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि अगले साल के अंत तक वैशाली में बुद्ध स्मृति स्तूप का निर्माण हो जाएगा। बुद्ध स्मृति स्तूप का निर्माण पत्थर से किया जा रहा है। ताकि यह सालों-साल चले। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्थल के पास ही जो पुरावशेष मिले हैं, उससे पता चलता है कि भगवान बुद्ध के अंतिम संस्कार के बाद उनके अवशेष यहीं थे। उन्होंने यह भी बताया कि वैशाली को बुद्ध सर्किट से और अच्छी तरह से लिंक करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार काम कर रही है।

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