एनडीए में वीआईपी भी

अभिषेक, पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए में सीटों के बंटवारे की घोषणा के एक दिन बाद एक नई पार्टी की आमद हो गई। इस पार्टी का नाम है-विकासशील इंसान पार्टी यानी वीआईपी। बुधवार को भारतीय जनता पार्टी ने मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी के साथ गठबंधन की जानकारी दी। विडंबना देखिए कि एनडीए के पुराने सदस्य लोजपा से तालमेल ना करने वाली पार्टी जदयू ने अपने खाते से जहां जीतन राम मांझी की हम पार्टी को सात सीटें दी हैं, वहीं अब वीआईपी को भाजपा ने 11 सीटें दी हैं। आगे चलकर मुकेश सहनी को विधान परिषद की सीट भी दी जाएगी। गौरतलब है कि एनडीए में जदयू को 122, भाजपा को 121 सीटें मिली हैं।



सहनी के एनडीए के साथ चुनाव लड़ने का एलान वीआईपी प्रमुख के साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने किया। जायसवाल ने कहा कि भाजपा और जदयू ने मंगलवार को जब सीटों के तालमेल की घोषणा की थी, तभी यह बता दिया गया था कि सहनी को हम अपने कोटे की सीटें देंगे। इस मौके पर मुकेश सहनी ने कहा कि एनडीए के साथ मिलकर नीतीश कुमार को एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनाना है। महागठबंधन ने पीठ में छुरा घोंपा था, लेकिन एनडीए ने मरहम लगाया है। प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने राजद और कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि दोनों ने बिहार के दलित और अतिपिछड़ों को हमेशा धोखा दिया है। मुकेश सहनी के साथ भी महागठबंधन के नेताओं ने ऐसा ही किया, लेकिन भाजपा सहनी का एनडीए में स्वागत करती है। एक सवाल के जवाब में सहनी ने एनडीए की सरकार बनने पर डिप्टी सीएम जैसी शर्त रखने से इंकार किया। कहा कि ऐसी बातें महागठबंधन के लिए थीं।

जहां तक मुकेश सहनी की बात है तो उनका राजनीतिक इतिहास बहुत लंबा नहीं है। 2014 के लोकसभा चुनाव में वह एनडीए के साथ थे। 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा का साथ दिया। वह मल्लाह समुदाय से आते हैं और बिहार में अच्छी आबादी है। इसे देखते हुए उन्होंने 2018 में अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले वह महागठबंधन में चले गए। तीन सीटों पर चुनाव लड़ा, पर हासिल कुछ ना हुआ। वह खुद खगड़िया संसदीय सीट से चुनाव मैदान में थे। बता दें कि बिहार में मल्लाह समुदाय की आबादी करीब छह फीसदी है। इसके तहत 10 उपजातियां आती हैं।

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