बच्चे घूमने गए पटना, नालंदा और गाइड की रसीद कटी बेगूसराय में

विजय, दरभंगा। झटपट बदले मुकद्दर तू देख बबुआ वाला गीत शिक्षा विभाग पर सटीक बैठता है। यह कहने में और सुनने में अटपटा जरूर लगता हो, लेकिन बेगूसराय में यह वास्तविकता है। 500 रुपये का रसीद लो और 20 रुपये हजार का कैश भजाओ। जी हां, ऐसा ही हाल मुख्यमंत्री परिभ्रमण योजना का हो चला है। जहां बिहार सरकार ने प्रत्येक विद्यालय को 20 हजार रुपये बिहार दर्शन योजना के तहत दिए थे। इसमें परिभ्रमण के दौरान गाइड को भी साथ में रखना था, लेकिन परिभ्रमण तो हो गया, पर गाइड की रसीद नहीं ले पाए।

परिभ्रमण हुआ है या नहीं है, यह एक अलग सवाल है। बता दें कि 2017-18 में 730 विद्यालय को 20000 रुपये प्रत्येक विद्यालय को राशि मुहैया कराई गई। 2018-19 में 318 विद्यालय को डीपीओ स्थापना के द्वारा 20000 रुपये प्रति विद्यालय को बिहार दर्शन योजना के तहत राशि दी गई थी। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि सभी विद्यालयों के प्रधान ने छात्रों को पटना और नालंदा को घुमा दिया, पर गाइड का रसीद ही नहीं लिया। जबकि वास्तविकता यह है कि किसी भी विद्यालय के प्रिंसिपल ने गाइड रखे ही नहीं थे। बताते चलें कि परिभ्रमण के दौरान बिहार टूरिज्म एजुकेशन टूर गाइड को मार्गदर्शक गाइड रखना था। लेकिन विद्यालय ने नहीं रखा। जब इसकी उपयोगिता प्रमाण पत्र विभाग को भेजा गया तो वहां से वापस कर गाइड की रसीद लेना अनिवार्य बताया गया।

इसी को लेकर डीपीओ स्थापना सुमन शर्मा ने सात अक्टूबर को अपर मुख्य सचिव शिक्षा विभाग पटना के पत्रांक 88 दिनांक 20 जनवरी 2020 के आलोक में गाइड विनोद कुमार से मार्गदर्शन लेने की बात कही। इसमें सभी विद्यालय प्रधान को आदेश दिया गया कि 9 अक्टूबर को स्वर्ण जयंती पुस्तकालय के कार्यालय में दस बजे दिन में मूल फोल्डर के साथ उपस्थित होंगे और गाइड से मार्गदर्शन लेंगे। लेकिन इसके विपरीत गाइड विनोद कुमार ने 500 रुपये में ब्लैंक रसीद बेचना शुरू कर दिया। जिन्हें दो साल की रसीद चाहिए, उन्हें 1000 रुपये देना था।

कई विद्यालय प्रधान स्वेच्छा से रसीद कटाने में मग्न रहे। इससे प्रतीत होता है कि इन्होंने परिभ्रमण कागज पर ही कराए। वहीं गाइड विनोद कुमार ने बताया कि डीपीओ स्थापना ने ही मुझे पत्र दिया है कि सभी प्रधान को बिहार टूरिज्म एजुकेशन टूर गाइड का रसीद मुहैया कराएं। लेकिन इसके विपरीत लेनदेन करने लगे। जिसका वीडियो भी उपलब्ध है। जब इस संदर्भ में डीपीओ स्थापना से बातचीत की तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। इस संदर्भ में जब जिला शिक्षा पदाधिकारी रजनीकांत प्रवीण से पूछा गया तो उन्होंने जानकारी नहीं होने की बात कही। वहीं आदेश देते हुए कहा कि उन सभी विद्यालय प्रधानों से स्पष्टीकरण की मांगा जाए जिन्होंने परिभ्रमण के दौरान गाइड के रसीद नहीं लिए थे।

लेकिन यह तो प्रश्न उठता है कि नालंदा और पटना में परिभ्रमण हुआ 2017-18 और 18-19 में। लेकिन गाइड की रसीद बेगूसराय जिले के स्वर्ण जयंती पुस्तकालय में कटी। इस मामले की जानकारी मिलते ही एक अन्य गाइड भी पहुंचकर एक-दूसरे से बहस कर बैठे। शिक्षक समाज में इस तरह की लेनदेन की कड़ी भर्त्सना की जा रही है।

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