मिथिलांचल और तिरहुत में बदलाव के संकेत नहीं

विमलनाथ झा, दरभंगा। मिथिलांचल के दरभंगा-मधुबनी जिले में दूसरे चरण की नौ सीटों पर तीन नवंबर को हुए चुनाव में फिफ्टी-फिफ्टी का मुकाबला दिख रहा है। कुछ सीटों पर चिराग पासवान की लोजपा और निर्दलीय बागियों ने भी खेल बिगाड़ा है। वैसे मिथिलांचल और तिरहुत में दूसरे चरण के मतदान के विश्लेषण से जो तस्वीर उभर रही है, उसके मुताबिक भाजपा को 13, जदयू को 5, वीआईपी को 2, राजद को 6 औऱ कांग्रेस को 3 सीटें मिल सकती हैं। जबकि माकपा, लोजपा और निर्दलीय को एक-एक सीट से संतोष करना पड़ सकता है। बता दें कि दूसरे चरण में दरभंगा, समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर में पांच- पांच सीटों , मधुबनी में चार, सीतामढ़ी में तीन, शिवहर में एक, पूर्वी चंपारण में छह तो पश्चिमी चंपारण में तीन सीटों के लिए वोट डाले गए हैं। दूसरे चरण के साथ बिहार विधानसभा की कुल 243 में से 165 सीटो पर मतदान संपन्न हो चुका है। शेष सीटों पर तीसरे चरण यानी सात नवंबर को मतदान है। परिणाम दस नवंबर को आएंगे। अब तक अनुमानों के हिसाब से सबसे बड़ा उलटफेर समस्तीपुर जिले में हसनपुर सीट पर संभव है। वहां से राजद नेता और लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेजप्रतापर यादव चुनाव मैदान में हैं। उन्हें जदयू के राजकुमार राय से कड़ी टक्कर मिली है। बताया जा रहा है कि बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों के वोट काट लेने से जदयू प्रत्याशी भारी पड़ सकता है। हालांकि खुद तेजप्रताप जीत को लेकर आशान्वित हैं।

दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान (सुरक्षित) क्षेत्र में जदयू और लोजपा के वोटों में बिखराव के कारण कांग्रेस प्रत्याशी अशोक कुमार की स्थिति बेहतर मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, लोजपा नेता चिराग पासवान के अंतिम समय में यहां आने से जदयू के वोट में सेंधमारी हुई। वैसे जदयू भी जीत का दावा कर रहा है। गौड़ाबौराम क्षेत्र में वीआईपी के संरक्षक मुकेश सहनी निर्दलीय प्रत्याशियों की सेंधमारी को रोकने में सफल रहे। इसीलिए उनकी प्रत्याशी स्वर्णा सिंह की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। राजद के अफजल अली खां के वोट बैंक में निर्दलीय बनकर उतरे इजहार अहमद ने सेंधमारी कर समीकरण को बिगाड़ दिया है। उधर, बेनीपुर में लोजपा के बिनोद झा उर्फ कमल सेठ की सक्रियता ने शुरू से ही मुकाबले को त्रिकोणीय बना रखा था। लेकिन मतदान से एक दिन पहले एनडीए नेताओं की गोलबंदी से जदयू प्रत्याशी विनय कुमार चौधरी की स्थिति बेहतर हुई। वैसे जीत का दावा कांग्रेस प्रत्याशी मिथिलेश चौधरी भी कर रहे हैं। उनके खेमे को लगता है कि तीनों प्रमुख प्रत्याशियों के ब्राह्मण होने से वोट बंटे हैं। खासकर नवादा जैसे बड़े गांव में। वहां जहां मिथिलेश चौधरी का ननिहाल बताया जा रहा है, वहीं लोजपा प्रत्याशी कमल सेठ का गांव ही है।

अलीनगर में एनडीए में शामिल वीआईपी के मिश्रीलाल यादव इस बार इस अभेद्य किले को भेदने में सफल हो सकते हैं। पिछले चुनाव में पराजय के बाद से ही वह यहां सक्रिय थे। बताया जाता है कि पिछली बार यहां से विजयी रहे राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने चुनाव क्षेत्र में मिश्रीलाल यादव की सक्रियता से घबरा कर ही केवटी जाने का फैसला किया। ऐसे में इस बार राजद के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे विनोद मिश्र वोटों के बिखराव को रोकने में सफल नहीं माने जा रहे। वैसे राजद खेमे में जीत जैसा उत्साह पूरा है। उधर, दरभंगा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में दो दशक से अधिक समय से जमे राजद प्रत्याशी ललित यादव इस बार भी अपने अभेद्य किले को बचाने में सफल माने जा रहे हैं। हाल ही में राजद छोड़ जदयू में आए डॉ.फराज फातमी अबकी पार्टी से लेकर क्षेत्र भी नया था। पिछली बार वह केवटी क्षेत्र से राजद के विधायक बने थे। दूसरी ओर लोजपा प्रत्याशी प्रदीप ठाकुर ने भी उनके मतों में अच्छी सेंधमारी की है। हालांकि राजनीति के चतुर सुजान कहे जाने वाले मिथिलांचल के वरिष्ठ नेता अली अशरफ फातमी इस बार अपने पुत्र डॉ. फराज की जीत का दावा कर रहे हैं।

मधुबनी में पूर्व भाजपा विधायक रामदेव महतो के बागी होकर निर्दलीय प्रत्याशी बन जाने से वीआईपी के सुमन महासेठ की स्थिति डांवाडोल हो गई है। वहां निवर्तमान विधायक समीर सेठ की अच्छी बताई जा रही है। वैसे शिवसेना ने भी तीसरे महासेठ शंकर को प्रत्याशी बनाया है। लेकिन एनडीए के वोटों के बिखराव का लाभ यकीनन राजद प्रत्याशी के रामवाण दिख रहा है। उधर, राजनगर (सुरक्षित)) से एक बार फिर विधायक रामप्रीत पासवान के जीतने की संभावना है। वह भाजपा प्रत्याशी हैं। उनके प्रतिद्वंद्वी राजद के रामअवतार पासवान और राजद-डी से शिवशंकर पासवान हैं। इन दोनों के बीच मतों के बिखराव से रामप्रीत पासवान की राह आसान मानी जा रही है। गौरतलब है कि 2015 में जिले में एकमात्र राजनगर से ही भाजपा को जीत मिली थी। जीतने वाले रामप्रीत पासवान ही थे। उन्हें लोजपा का प्रत्याशी नहीं रहने का भी लाभ मिला है। जबकि झंझारपुर में राजद के विधायक गुलाब यादव की नाराजगी से झाजपा प्रत्याशी नीतीश मिश्रा की राह आसान दिखती है। महागठबंधन ने इस बार यह सीट भाकपा को दे दी है। भाकपा की ओर से राम नारायण को प्रत्याशी बनाने के बाद विधायक सहित राजद कार्यकर्ताओं में जो नाराजगी फैली थी, उसे मतदान तक दूर नहीं किया जा सका। इसका असर मतदान केंद्रों पर भी दिखा। वैसे लोजपा और जाप ने भी यहां थोड़ी-बहुत सक्रियता दिखाई। इसी तरह फुलपरास में जदयू विधायक गुलजार देवी के बागी हो जाने से कांग्रेस प्रत्याशी कृपानाथ पाठक की राह आसान हो गई है। वैसे लोजपा के विनोद कुमार सिंह के कारण भी यहां मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

चुनावी विश्लेषकों के नजरिये से दूसरे चरण के बाद कुछ ऐसा रह सकता है दृश्‍य-

दरभंगा

1. कुशेश्वरस्थान (सुरक्षित) : डॉ. अशोक कुमार (कांग्रेस)

2. गौड़ाबौराम : स्वर्णा सिंह (वीआईपी)

3. अलीनगर : मिश्रीलाल यादव (भाजपा)

4. दरभंगा ग्रामीण : ललित यादव (राजद)

5. बेनीपुर : विनय चौधरी (जदयू)

मधुबनी

1. मधुबनी : समीर महासेठ (राजद)

2. झंझारपुर (सु.) : नीतीश मिश्रा (भाजपा)

3. राजनगर : रामप्रीत पासवान (भाजपा)

4. फुलपरास : कृपानाथ पाठक (कांग्रेस)

समस्तीपुर

1. रोसड़ा : वीरेंद्र पासवान (भाजपा)

2. हसनपुर : राजकुमार राय (जदयू)

3. मोहिउद्दीनगर : राजेश सिंह (भाजपा)

4 .उजियारपुर : आलोक कुमार मेहता (राजद)

5. विभूतिपुर : अजय कुमार (माकपा)

पूर्वी चंपारण

1. हरसिद्धि (सु) : कृष्णनंदन पासवान (भाजपा)

2. गोविंदगंज : सुनील मणि तिवारी (भाजपा)

3. पिपरा : श्यामबाबू प्रसाद यादव (भाजपा)

4. केसरिया : शालिनी मिश्रा (जदयू)

5. कल्याणपुर : मनोज यादव (राजद)

6. मधुबन : राणा रंधीर सिंह (भाजपा)

पश्चिम चंपारण

1. नौतन : नारायण प्रसाद (भाजपा)

2. बेतिया : मदन मोहन तिवारी (कांग्रेस)

3. चनपटिया : उमाकांत सिंह (भाजपा)

मुजफ्फरपुर

1. बरूराज : अरुण कुमार सिंह (भाजपा)

2. पारू : अशोक कुमार सिंह (भाजपा)

3. साहेबगंज : राजू सिंह राजू (वीआईपी)

4. मीनापुर : मनोज कुमार (जदयू)

5. कांटी : अजित कुमार ( निर्दलीय)

सीतामढ़ी

1. सीतामढ़ी : सुनील कुमार (राजद)

2. रुन्नीसैदपुर : गुड्डी देवी (लोजपा)

3. बेलसंड : सुनीता सिंह चौहान (जदयू)

शिवहर

शिवहर : चेतन आनंद (राजद)

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