एक मामले में बेल, फिर भी लालू को जेल

पटना। चारा घोटाले के एक मामले में सजायाफ्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को शुक्रवार को जमानत मिल गई। यह जानकारी उनकी छोटी बेटी रोहिणी आचार्य ने दी। उन्होंने यह सूचना फेसबुक पोस्ट से दी। उन्होंने लिखा, ‘आप सबके के आशीर्वाद से पापा को बेल मिल गया।’ सूचना फैलते ही लालू प्रसाद के जेल से बाहर आ जाने की उम्मीद में समर्थक खुशी मनाने लगे। लेकिन चाईबासा कोषागार मामले में झारखंड हाई कोर्ट से मिली इस राहत से जेल से निकलने का रास्ता नहीं खुल रहा है। वह दरअसल झारखंड में चारा घोटाले के चार मामले में सजायाफ्ता हैं। चाईबासा कोषागार के दो मामलों और देवघर कोषागार के एक मामले में लालू को जमानत पहले ही मिल चुकी है। लेकिन दुमका कोषागार का सबसे गंभीर मामला बाकी है। दूसरे, इसमें लालू प्रसाद की ओर से जमानत याचिका भी दाखिल नहीं की गई है। इस मामले में उन्हें सबसे अधिक सात साल की सजा मिली हुई है।

चाईबासा कोषागार के जिस मामले में उन्हें जमानत मिली है, उसमें पांच साल की सजा मिली हुई है। चूंकि ढाई साल वह जेल में रह चुके हैं, इस आधार पर जमानत दी गई है। आगे भी जमानत का यही आधार रहना है। यानी जिस मामले में सात साल की सजा है, उसमें आधी अवधि काटनी बाकी है। इस तरह राहत के लिए है उन्हें कम से कम अभी एक साल जेल में और रहना होगा। कहना ही होगा कि ऐसे में लालू प्रसाद का जलवा इस विधानसभा चुनाव में दिखना मुमकिन नहीं लग रहा है। यह समर्थकों के लिए जोर का झटका है। जेल से निकल आने पर बिहार की चुनावी राजनीति में बहुत कुछ देखने को मिलता। निश्चित तौर पर उनकी पार्टी राजद और महागठबंधन को फायदा होता। इसलिए कि राजद प्रमुख की सियासी ताकत सामाजिक समीकरण है। यादव और मुस्लिम वोटों पर उनकी मजबूत पकड़ है। लालू के जेल में होने से यह समीकरण गड़बड़ा रहा। ओवैसी के बिहार की राजनीति में रालोसपा के जरिए आ जाने से मुस्लिम वोट बैंक में बड़ी सेंध लग सकती है। राजद में नई पीढ़ी के नेताओं से इस पर नियंत्रण नहीं बन पा रहा है।

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