बिहार में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म

पटना। बिहार के सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में जारी जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल गुरुवार रात समाप्त हो गई। सभी जूनियर डॉक्टर तत्काल अपने-अपने काम पर लौटने को राजी हो गए। इस तरह 23 दिसंबर से जारी जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल आखिरकार नौवें दिन खत्म हुई। गौरतलब है कि छात्रवृत्ति में बढ़ोतरी की मांग को लेकर राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के करीब एक हजार जूनियर डॉक्टर नौ दिनों से सामूहिक हड़ताल पर थे। इससे मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा गई थी। जूनियर डॉक्टरों के वापस काम पर लौटने से एक बार फिर मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में चिकित्सा, जांच और इलाज की सुविधा पटरी पर आ जाएगी। मरीजों ने भी राहत की सांस ली है।

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत से मुलाक़ात के बाद जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म किया। डॉक्टरों ने दोनों के साथ हुई बातचीत को पूरी तरह सार्थक कहा। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा है इन लोगों की जो मांग है, वह जल्द से जल्द पूरी करने की कोशिश रहेगी। नए साल में बहुत ही अच्छी खबर है कि जूनियर डॉक्टर हड़ताल खत्म कर रहे हैं। गौरतलब है कि जूनियर डॉक्टरों और विभाग के बीच पहले भी कई बार बातचीत हुई थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला था। इसके बाद सरकार के निमंत्रण पर जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन की टीम स्वास्थ्य मंत्री से मिलने पहुंची। और, फिर नौ दिनों से जारी हड़ताल खत्म हो गई। जूनियर डॉक्टरों ने कहा है कि अब तक चिकित्सा व्यवस्था में जो कमी हुई है, उसे हम पूरा करेंगे।

इससे पहले पूर्व विकास भवन स्थित स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय में प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत के साथ करीब सवा घंटे बात हुई। बातचीत शाम सवा पांच बजे शुरू हुई। प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने जूनियर डॉक्टरों की कोरोना काल में राज्य की जनता की सेवा के लिए बधाई दी और उनसे काम पर वापस लौटने का आग्रह किया। जूनियर डॉक्टरों ने उनसे छात्रवृत्ति बढ़ाने को कहा। इस पर प्रधान सचिव ने जल्द निर्णय लेने का भरोसा दिया। इसके बाद प्रधान सचिव और हड़ताली डॉक्टरों का चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के आवास पर पहुंचें। वहां स्वास्थ्य मंत्री ने जूनियर डॉक्टरों को मिठाई खिलाते हुए और जनहित में हड़ताल खत्म करने को कहा। इसे मानते हुए जूनियर डॉक्टरों ने काम पर लौटने की घोषणा कर दी।

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