नीतीश सरकार में नौकरी देने का काम शुरू, लेकिन ठेके पर

पटना। बिहार में नई बनी एनडीए सरकार का पहला आदेश आ गया है। यह नियुक्तियों को लेकर ही है। लेकिन कोई इससे खुश हो, उससे पहले बता दें कि आदेश ठेके की नौकरी के लिए है। ना कि स्थायी सरकारी नौकरी के लिए। इस आदेश पर विपक्षी महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव के उस चुनावी वादे का दबाव साफ दिख रहा है, जिसमें उन्होंने सरकार बनते ही दस लाख लोगों को स्थायी सरकारी नौकरी देने की बात कही थी। इसके जवाब में सत्ता में साझीदार भाजपा ने अपने घोषणापत्र में 19 लाख नौकरी देने का वादा कर दिया था। अब जो हकीकत सामाने आई है, उसके मुताबिक ठेके (संविदा) पर नौकरी की प्रक्रिया शुरू की गई है।

नई पारी में नीतीश सरकार ने जो अपना पहला आदेश निकला है, उसने भाजपा के घोषणापत्र को महज जुमलेबाजी साबित कर दिया है। यही कारण है कि सरकार ने अपने इस आदेश को बहुत ही दबे अंदाज में जारी किया है। सभी विभागों के लिए आदेश वाला यह पत्र यूं तो निकला 17 नवंबर को है, लेकिन उसे डंके की चोट पर जारी करने का साहस नहीं दिखाया गया। इससे 18 नवंबर को भी यह बात ठीक से सार्वजनिक नहीं हो पाई। मंत्री तो मंत्री, कोई अधिकारी तक बोलने को तैयार नहीं है। बहरहाल, बिहार सरकार के उप सचिव गुफरान अहमद के दस्तखत से जारी इस पत्र में ठेके पर नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी गई है।

गौरतलब है कि जिन विभागों में ठेके पर नौकरियां दी जानी हैं, उनमें स्वास्थ्य विभाग सबसे प्रमुख है। इस विभाग में पहले भी ठेके पर सबसे अधिक नियुक्तियां हुई हैं। यहां इतने पद खाली पड़े हैं कि पूरा स्वास्थ्य महकमा लगभग पटरी से उतर गया है। इससे चौतरफा असंतोष है। इसी के मद्देनजर चुनाव के दौरान भाजपा ने दावा किया था कि उसकी सरकार बनी तो 10 हजार डॉक्टर, 50 हजार पारा मेडिकल कर्मचारियों के अलावा कुल एक लाख लोगों को सिर्फ स्वास्थ्य विभाग में नौकरी दी जाएगी।

बहरहाल, सामान्य प्रशासन विभाग की ओर जारी पत्र के मुताबिक, 2007 में राज्य सरकार ने सरकारी दफ्तरों में खाली पड़े पदों को ठेके (संविदा) पर नियुक्ति से भरने का फैसला किया था। इसकी नियमावली भी बना ली गई थी। उसके आधार पर ठेके पर नियुक्तियां करने के बावजूद काफी पद खाली पड़े रह गए हैं। इन खाली पड़े पदों को ठेके पर ही नियुक्तियों से भरा जाना है। इसलिए सभी विभागों के प्रमुखों से यह ब्योरा तत्काल मांगा गया कि उनके यहां कितने स्वीकृत पद हैं। और, ऐसे पदों पर ठेके पर कितने लोग काम कर रहे हैं। नियुक्तियां हो जाने के बाद भी कितने पद खाली रह गए हैं, जिन्हें ठेका कर्मचारियों से भरा जाना है। सरकार ने अपने अधिकारियों से सबसे पहले यही जानकारी देने को कहा है।

बेरोजगारी दर 10 प्रतिशत-

गौरतलब है कि इस वर्ष अप्रैल में बिहार में बेरोजगारी की दर 46.6 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। पिछले महीने के आंकड़ों के मुताबिक, देश में औसत बेरोजगारी की दर जहां सात प्रतिशत है, बिहार में यह 10 प्रतिशत है। ऐसे में अब जब राज्य में एनडीए की सरकार फिर से आ गई है तो यह सवाल लाजिमी है कि क्या भाजपा 19 लाख युवाओं को रोजगार देगी? या यह चुनावी वादा भी एक जुमला बनकर रह जाएगा?

मदरसा, संस्कृत और अल्पसंख्यक हाई स्कूलों में वेतन बढ़ा-

इस बीच, राज्य के 814 मदरसों, 72 गैर सरकारी मान्यताप्राप्त अनुदानित अल्पसंख्यक हाई स्कूलों और 47 अनुदानित संस्कृत स्कूलों के शिक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी कर दी गई है। यह वृद्धि एक अप्रैल, 2021 से लागू होगी। करीब सात हजार शिक्षकों को लाभ पहुंचाने वाले इस फैसले की अधिसूचना शिक्षा विभाग ने जारी भी कर दी है। बता दें कि गत 29 अगस्त को पंचायती राज संस्थानों और नगर निकाय संस्थानों के तहत कार्यरत शिक्षकों और पुस्तकालायाध्यक्षों के वेतन में एक अप्रैल, 2021 से 15 प्रतिशत की वृद्धि का फैसला हुआ था। अब उसी फैसले को अल्पसंख्यक विद्यालयों ,मदरसों और संस्कृत स्कूलों में भी लागू किया जाएगा। इस तरह की वेतन वृद्धि ईपीएफ स्कीम प्रोस्पेक्टिव इफैक्ट के आधार पर होगी। उदाहरण के लिए राज्य के गैर मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक विद्यालय के वे शिक्षक, जिनका मासिक वेतन 15 हजार रुपये है, उनके लिए राज्य सरकार अपना अंशदान 13 प्रतिशत देगी। इस कोटि के 18 श्रेणी के इंडेक्स वेतनमान देय होंगे। प्रत्येक में तीन लेवल हैं। इंडेक्स वन में लेवल वन के शिक्षकों को 13370 , लेवल दो के शिक्षकों को 19540 और तीसरे लेवल के इसी इंडेक्स के शिक्षकों को 20560 रुपये वेतन मिलेगा। सबसे अंतिम इंडेक्स 18 के लेवल वन के शिक्षक को 22200, लेवल टू के शिक्षक को 32440 और लेवल थ्री के शिक्षक को 34080 रुपये वेतन दिया जायेगा। बता दें कि पे-मैट्रिक्स में ग्रेड पे 2400 और 2800 रुपये है। लेवल वन पर इंट्री पे 5200- सेकेंड लेवल पर 7600 और लेवल थ्री पर इंट्री पे 8000 है। इसके अलावा इन शिक्षकों को समय-समय पर घोषित मंहगाई भत्ता, चिकित्सा भत्ता, मकान किराया भत्ता और वार्षिक वेतन वृद्धि देय होगी।

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