जिन्ना विवाद में कट सकता है कांग्रेस के जाले प्रत्याशी का टिकट

विमलनाथ झा, दरभंगा। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर लगाने को लेकर उठे विवाद में मशकूर अहमद उस्मानी को दरभंगा के जाले से मिला कांग्रेस का टिकट छिन सकता है। भाजपा को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल जाने से पार्टी बैकफुट पर आ गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जाले से प्रत्याशी बदला भी जा सकता है। इसके लिए पार्टी के बड़े नेता लगातार राहुल गांधी और सोनिया गांधी के संपर्क में हैं। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला समेत तमाम बड़े नेताओं ने शनिवार को इस सवाल पर चुप्पी साधे रखी। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि इस मामले को पार्टी के अन्य बड़े नेता देख रहे हैं। हालांकि उस्मानी ने फिर दोहराया है कि जिन्ना की तस्वीर को लगाने और समर्थन करने का कोई सवाल ही नहीं है। हम गांधी की विचारधारा को मानने वाले लोग हैं। भारत में जिन्ना का सवाल कैसे हो सकता है।

बता दें कि दरभंगा की जाले सीट से श्री मिश्र समेत कांग्रेस में कई ब्राह्मण उम्मीदवार दावेदार थे। लेकिन पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवार को तवज्जो दी। उस्मानी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के अध्यक्ष हुआ करते थे। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी छात्र संघ के दफ्तर में पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना की तस्वीर लगा रखी थी। इस मसले पर भारी विवाद हुआ था। उन्हें टुकड़े-टुकड़े गैंग का भी बताया जा रहा है। दरअसल विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी चयन के लिए जिला एवं राज्य समिति की अनुशंसा को दरकिनार कर पैराशूट नेताओं को टिकट देने से अधिकतर जगहों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। महागठबंधन के साथ सीटों के तालमेल में दरभंगा जिले की दस में से तीन -जाले, बेनीपुर और कुशेश्वरस्थान- सीटें कांग्रेस को मिलीं। बाकी सात सीटों पर राजद के प्रत्याशी हैं। कुशेश्वरस्थान से डॉ.अशोक कुमार सहित जाले बेनीपुर से प्रत्याशी के लिए जिला एवं प्रदेश कमिटी जिन नामों की अनुशंसा की थी। इसे दरकिनार कर केंद्रीय नेतृत्व ने जाले से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष मशकूर उस्मानी और बेनीपुर से मिथिलेश चौधरी को प्रत्याशी बना दिया गया है। इनके नामों से इनके क्षेत्र के कार्यकर्ता बुरी तरह बिदक गए हैं।

एक सीनियर कांग्रेस नेता ने बताया कि दो माह पूर्व पार्टी की ओर से सदस्यता अभियान चलाया गया था। तब पार्टी नेतृत्व ने सर्वाधिक सदस्य बनाने वाले को विधानसभा चुनाव के समय प्रत्याशी बनाने की घोषणा की थी। इस लिहाज से जिला अध्यक्ष सहित दो और वरिष्ठ नेताओं को प्रत्याशी बनना चाहिए था। इतना ही नहीं, जाले से प्रत्याशी बने उस्मानी साहब का नाम भी क्षेत्र के लोगों ने शायद ही सुना था। वह दरभंगा स्थित खान चौक के रहने वाले बताए जाते हैं। इसी तरह बेनीपुर से प्रत्याशी बने मिथिलेश चौधरी की भी कभी खास सक्रियता नहीं देखी गई।

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