बिहार में जदयू-बीजेपी को चुभने लगे तीर

आर्यांश, पटना। शायद ही किसी रिश्ते में इतनी जल्दी खटास आती हो, जितनी बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए में दिखने लगी है। महज 40 दिन हुए हैं इस नई सरकार को बने। और, सत्तारूढ़ गठबंधन के दो प्रमुख सहयोगी-बीजेपी और जदयू के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। अरुणाचल प्रदेश में जदयू के छह विधायकों को बीजेपी ने भले अपने पाले में कर लिया हो, लेकिन उसकी वजह से बिहार जैसे राज्य में बहुत कुछ हाथ से फिसल सकता है। शनिवार की रात जदयू के पदाधिकारियों और राष्ट्रीय नेताओं के संग नीतीश कुमार की बैठक पर छाई खामोशी किसी बड़े तूफान का इशारा कर रही हैं। इसका कुछ संकेत यकीनन रविवार को मिल सकता है, जब पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी। इसमें जदयू अपने चुनाव चिह्न तीर को बीजेपी पर चलाने में कतई संकोच नहीं करने जा रही है। इसका हल्का इशारा शनिवार को जदयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने यह कहते हुए दे भी दिया कि बीजेपी ने अरुणाचल में जो काम किया है, वह दोस्ती की नीयत पर सवाल खड़ा करता है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ चली तीन घंटे की बैठक के बाद जदयू के एक पदाधिकारी के मुताबिक, बीजेपी के प्रति नाराजगी जरूर दिखाई जाएगी। लेकिन खुल कर नहीं। फिलहाल ऐसा कोई रिस्क नहीं लिया जाएगा, जिससे बिहार की सत्ता पर ही संकट आ जाए। इसलिए मुद्दे राष्ट्रीय उठाए जाएंगे। वैसे, जिनपर बीजेपी से उलट स्टैंड दिखाई दे। इन मुद्दों पर प्रस्ताव तक पारित हो सकते हैं। इससे दो काम होंगे। पहला, बीजेपी से अलग रुख होने का मैसेज जाएगा। दूसरे, बिहार में गठबंधन सरकार पर आंच भी नहीं आएगी। इस लिहाज से सबसे बड़ा मुद्दा उठाया जाएगा-किसान का। सूत्रों के मुताबिक, इस पर प्रस्ताव नीतीश कुमार के घर पर तैयार हो रहा है। ऐसे ही चुन-चुन कर मुद्दे उठाए जाएंगे, जिससे बीजेपी तिलमिला कर रह जाए। सूत्र यह भी बताते हैं कि शायद अरुणाचल का मुद्दा राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नहीं उठेगा। इसलिए भी कि अरुणाचल प्रदेश में जदयू का बीजेपी के साथ कोई समझौता या गठबंधन नहीं था।

नीतीश नहीं छिपा रहे मतभेद

सूत्रों के मुताबिक, बिहार में जिस तरीके से चल रही है उससे नीतीश कुमार बहुत खुश नहीं हैं। उनकी सहयोगी बीजेपी के नए कर्ता-धर्ताओं खास बन नहीं रही है। इस बारे में सूत्र नई सरकार बनने के इतने दिनों बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नीतीश कुमार की मुलाकात नहीं होने की ओर इशारा करते हैं। जबकि उनके दोनों डिप्टी सीएम अभी-अभी मिल कर आ गए हैं। दूसरे, अभी पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद की मां के निधन पर भी नीतीश कुमार उनके घर नहीं गए। नीतीश कुमार को जानने वाले इसे सामान्य बात नहीं मान रहे हैं। इसलिए कि मुख्यमंत्री के आवास से रविशंकर प्रसाद का घर कुछ ही दूर है।

बंगाल में बीजेपी से नहीं होगा तालमेल

जदयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने बताया कि पार्टी पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों में अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। वहां बीजेपी से कोई तालमेल नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी से तालमेल सिर्फ बिहार में है। इसीलिए पार्टी पहले भी बीजेपी से अलग होकर झारखंड और दिल्ली वगैरह में चुनाव लड़ चुकी है। पार्टी अब दूसरे राज्यों में अपना जनाधार बढ़ाने का काम करेगी।

राजद और कांग्रेस को आया तरस

अरूणाचल में छह विधायकों को खोने वाले नीतीश कुमार पर कांग्रेस और राजद को तरस आया है। दोनों पार्टियों ने नीतीश कुमार को आत्मनिर्भर बीजेपी से बच कर रहने को कहा है। कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने नीतीश कुमार को नसीहत देते हुए कई ट्वीट किए हैं। अधीर रंजन चौधरी ने लिखा कि नीतीश जी, बीजेपी से सावधान रहें। वह उत्तर पूर्वी क्षेत्र के कुख्यात जंगली जानवरों के शिकारियों की तरह अवैध रूप से शिकार करने में निपुण है। उधर, राजद के प्रवक्ता और सांसद मनोज झा ने कहा कि उन्हें नीतीश कुमार की बेबसी पर तरस आ रहा है। उनके छह विधायकों को सहयोगी बीजेपी ने ही छीन लिया और नीतीश जी विरोध में एक शब्द नहीं बोल पा रहे हैं।

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