मधुबनी में पहले रावण गिरोह ने खेली खून की होली, अब करणी सेना का तांडव

दरभंगा। तमाम तरह की कोशिशों के बावजूद मधुबनी में होली के दिन पांच लोगों की हत्या से भी बचा रह गया सामाजिक ताना-बाना शुक्रवार को करणी सेना के हाथों आखिरकार जल ही गया। फिर कारण बनी नीतीश सरकार की पुलिस। वह शुक्रवार को भी बेनीपट्टी थाने के गैवापुर गांव में उसी तरह निकम्मी बनी रही रही, जैसी महमदपुर में 29 मार्च को। उसी दिन प्रवीण झा उर्फ रावण के गिरोह ने खून की होली खेली थी। नरसंहार की उस घटना के बावजूद जो मामला जातिगत नहीं बना था, उसे करणी सेना के उत्पातियों ने बना दिया। करणी सेना के लोगों ने गैवापुर गांव पर हमला कर दिया। लोगों से मारपीट के बाद घरों में आग लगा दी। इस हमले के दौरान वहां तैनात पुलिस के जवान औऱ अधिकारी गांव छोड़ कर भाग गए।

बता दें कि राजस्थान से आए करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने एक दिन पहले ही गुरुवार को कहा था कि महमदपुर हत्याकांड का इंसाफ वे खुद कर लेंगे। शुक्रवार को गाडियों के लंबे काफिले के साथ करणी सेना के लोग महमदपुर गांव पहुंचे। वहां पीड़ित परिवार से मुलाकात की। फिर बगल के उस गैवापुर गांव पर हमला बोल दिया, जो हत्याकांड के मुख्य आरोपी प्रवीण झा उर्फ रावण का भी है। हालांकि पुलिस उसके घर को कुर्क कर पहले ही ध्वस्त कर चुकी है, चार साथियों के साथ प्रवीण झा को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। फिर भी करणी सेना वालों ने गैवापुर गांव पर ना सिर्फ हमला किया, बल्कि सबके साथ भयंकर मारपीट की। उस चंद्रशेखर मिश्र के घर में आग लगा दी, जिसका इस पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं है। उत्पातियों के जाने के बाद पुलिस ने दमकल वालों को बुलाया। फिर किसी तरह आग पर काबू पाया जा सका। करणी सेना के इस उत्पात के बाद इलाके में सामाजिक तनाव फैल गया है। कभी भी कोई नई और बड़ी घटना की आशंका है। लोग नीतीश सरकार के रुख से बेहद नाराज हैं। खासकर पुलिस की भूमिका से। इस बीच, मुख्य विपक्षी पार्टी राजद ने हत्याकांड के विरोध में 10 अप्रैल को मधुबनी बंद का एलान किया है।

पीड़ित परिवार को गोद लेने का एलान-

पीड़ित परिवार से मिलने के बाद करणी सुप्रीमो लोकेंद्र सिंह कलवी ने कहा कि हमारी मांग उन पांचों लोगों को वापस लौटाने की है, जो संभव नहीं है। ऐसे में उन्हें न्याय दिला दो। पूरी सरकार और प्रशासन अपराधियों को बचाने में लगी है। यही सब नहीं होने देने वाली संगठन का नाम करणी सेना है। हम पीड़ित परिवार को गोद लेने आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो सब करते हैं, वह हम नहीं करेंगे। जो कोई नहीं करता, वह हम करेंगे।

पीड़ित परिवार के एकमात्र जीवित बेटे पर से हटा एससी-एसटी एक्ट-

इस बीच, पीड़ित परिवार के एकमात्र जीवित बचे पुत्र संजय सिंह के खिलाफ दर्ज एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा हटाया जाएगा। वह इस झूठे मामले में पिछले साल नवंबर से ही जेल में बंद थे। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह गांव लौट आए हैं। शुक्रवार को प्रशासन ने उन्हें उस मुकदमे को खत्म करने की जानकारी दी। संजय सिंह के मुताबिक, नवंबर गैबीपुर गांव के प्रवीण झा के साथ तालाब से मछली मारने को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद ऐसे आदमी से उन पर एससी-एसटी एक्ट के तहत झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया, जिसे वह पहचानते तक नहीं। लेकिन बेनीपट्टी थाने के प्रभारी ने प्रवीण झा के कहने पर यह सब किया। अब वह थाना प्रभारी निलंबित है।

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