एनडीए के चुनाव प्रचार में फंसा लोजपा का गियर

अंशुमान, दरभंगा। बिहार विधानसभा का चुनाव समय के साथ परवान चढ़ता जा रहा है। पहले के बाद दूसरे चरण तक के लिए सभी दलों में प्रत्याशियों के नाम भी लगभग फाइनल हो चुके हैं। इसलिए अब जोर चुनाव प्रचार के लिए बढ़ रहा है। प्रचार के मामले में विपक्षी महागठबंधन पर भाजपा-जदयू ने शुरुआती बढ़त ले ली है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा गया से बिगुल फूंक गए। सोमवार से जदयू नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी दो दिवसीय डिजिटल रैली आरंभ कर दी। इस दौरान वह 35 विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं से मुखातिब हो रहे हैं।

एनडीए से राज्य में बाहर गई पार्टी लोजपा अभी अपने संस्थापक नेता रामविलास पासवान के निधन से उबरने में लगी है। बिहार में पासवान के निधन से चिराग के प्रति उमड़ी संवेदना भाजपा के सामने यक्षप्रश्न सरीखा हो गया है। इसके दो कारण हैं। एक तो केंद्र में लोजपा एनडीए में शामिल है। दूसरे, लोजपा के पास लगभग आठ प्रतिशत वोट है। 2015 में जदयू से अलग होकर लड़ी भाजपा को सबसे अधिक 24.4 प्रतिशत वोट मिले थे। अगर इसमें लोजपा अपना आठ प्रतिशत भाजपा को ट्रांसफर करा दे, तो पार्टी की बल्ले-बल्ले है। यही लाभ जदयू को नहीं मिलेगा। यही कारण है कि पार्टी को प्रचार के दौरान लोजपा के प्रति सहृदय रहने को कहा गया है। दो दिन पहले दिल्ली में प्रत्याशी चयन को लेकर हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी मकसद से शामिल हुए थे। इसलिए कि बिहार में एनडीए की ओर से वह सबसे बड़े प्रचारक हैं। उनके साथ मंच पर लोजपा से कोई नहीं होगा, लेकिन चिराग पासवान अपनी रैलियों में मोदी के नाम पर भी वोट मांगेंगे। वह 20 अक्तूबर को पिता का श्राद्धकर्म समाप्त कर सक्रिय होंगे। उधर, पासवान के निधन से जदयू के लिए भी आक्रामक होना थोड़ा मुश्किल हो गया है। इस तरह बिहार में एनडीए के चुनाव प्रचार में लोजपा का गियर बुरी तरह फंस गया है।

ऐसे में भाजपा तीन स्तर वाली रणनीति पर चल रही है। उसकी पहली इच्छा है, नीतीश कुमार की पार्टी को भाजपा से कम सीटें मिले। और, अगर भाग्य से कहीं कोई छींका टूटने से राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन को सबसे अधिक सीटें आ जाए, तो मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा भाजपा को मिले। इसलिए कि कई तरह के मुकदमों का सामना कर रहे राजद नेता तेजस्वी पर अंकुश रखना आसान होगा।

बहरहाल, यहां यह बता दें कि इस बार बिहार के पांच जिलों में भाजपा का कोई प्रत्याशी नहीं है। इन जिलों में जहानाबाद, शेखपुरा, खगड़िया, मधेपुरा और शिवहर शामिल हैं। इन पांचों जिलों में सहयोगी जदयू के उम्मीदवार हैं। बक्सर, अरवल, मुंगेर, लखीसराय और नालंदा जैसे पांच जिले ऐसे भी हैं, जहां भाजपा ने फकत एक-एक सीट पर ही प्रत्याशी दिया है। एनडीए में समझौते के तहत भाजपा को 121 और जदयू को 122 सीटें मिली हैं। भाजपा ने अपने हिस्से से 11 सीटें विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी को दी हैं। वहीं जदयू भी छह सीटें हिदुस्तानी अवाम मोर्चा के हवाले कर चुका है। इस तरह बिहार एनडीए में अभी चार दल हैं।

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