भ्रमित कांग्रेस से एनडीए को वाकओवर

विमलनाथ झा, दरभंगा। महागठबंधन में बड़े भाई की भूमिका वाले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस चुनाव में कांग्रेस को आशातीत 70 सीटें दी थीं। लेकिन प्रत्याशियों कके चयन में शीर्ष नेतृत्व ने जिस अदूरदर्शिता का परिचय दिया, वह हैरान करने वाला है। लेकिन प्रत्याशियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है, कि उसने चुनाव पूर्व ही सत्तारूढ़ एनडीए को वाकओवर दे दिया है।

तीन दशक से बिहार की सत्ता से बाहर कांग्रेस को पहली बार राजद ने इस बार 70 सीटें दी हैं। इसलिए कि 2015 के चुनाव में कांग्रेस को 40 विधानसभा क्षेत्रों में सफलता मिली थी। यहां यह बता देना जरूरी है कि पिछले चुनाव में राजद और कांग्रेस के साथ नीतीश की पार्टी जदयू का गठबंधन था। अबकी ऐसा नहीं है। यह अंतर पूर्व के लोकसभा और विधानसभा चुनावों को देखने से और स्पष्ट हो जाता है। लेकिन अपेक्षा से अधिक सीटें महागठबंधन से मिलने के बावजूद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने टिकट बंटवारे में जो अदूरदर्शिता दिखाई है, उससे कार्यकर्ताओं में उत्साह के बदले निराशा का माहौल है। इसका सीधा लाभ एनडीए को अभी से मिलने की संभावना बढ़ गई है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चुनाव से दो माह पूर्व आलाकमान ने प्रत्याशियों के चयन में पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए सभी जिलों में एक-एक पर्यवेक्षक भेजा था। इसी सिलसिले में दरभंगा जिले के लिए कृपानाथ पाठक दो दिनों तक जिले की सभी दस सीटों के लिए संभावित प्रत्याशियों से बायोडाटा भी लिया था। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा इसी जिले से हैं। इसीलिए कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि महागठबंधन से तालमेल के बाद प्रत्याशियों के चयन में प्रदेश अध्यक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

सूत्रों के अनुसार जिला कमिटी, पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट की विवेचना कर राज्य की स्क्रीनिंग कमिटी ने जो सूची केंद्रीय आलाकमान को भेजी, उसे पूरी तरह दरकिनार कर पैराशूट उम्दीवारों को चुनाव मैदान में उतारर दिया गया है। खासकर जिले के जाले विधानसभा क्षेत्र में जिस मशकूर अहमद उस्मानी को प्रत्याशी बनाया गया है, उसे लेकर जिले के कांग्रेसियों में भारी आक्रोश है। इसका प्रभाव दरभंगा के अलावा अन्य जिलों में भी पड़ेगा। वैसे जिले के कांग्रेसी अभी 22 अक्तूबर को होने वाले विधान परिषद चुनाव में व्यस्त हैं। इसलिए कि दरभंगा शिक्षक क्षेत्र से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.मदन मोहन झा खुद प्रत्याशी हैं।

गौरतलब है कि जाले के इस प्रत्याशी का नामांकन अब तक नहीं हुआ है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अगर उन्हें नहीं बदला गया तो नामांकन के समय कांग्रेस के कौन-कौन नेता शामिल होते हैं। पुराने कांग्रेसी तो मानकर चल रहे हैं कि पार्टी को इस फैसले का परिणाम भुगतना पड़ेगा।

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