दूसरे चरण में 54 प्रतिशत ही वोट पड़े, महागठबंधन का 65 सीटें जीतने का दावा

पटना। तीन चरणों में हो रहे बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 17 जिलों की 94 सीटों पर 54.44 प्रतिशत मतदान हुआ। पहले चरण में 28 अक्तूबर को 71 सीटों पर 55.9 प्रतिशत मतदान हुआ था। मंगलवार को दूसरे चरण में जिन 94 सीटों पर मतदान हुआ, उन पर 2015 में 56.17 और 2010 में 51.7 प्रतिशत वोट डाले गए थे। इस तरह इस बार 2010 से तीन प्रतिशत अधिक और 2015 के चुनाव से दो प्रतिशत कम वोट पड़े हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने कहा है कि दूसरे चरण में हई वोटिंग का अंतिम आंकड़ा एक-दो दिनों में जारी करेगा। बता दें कि बिहार में तीसरे चरण की वोटिंग सात नवंबर को होगी। नतीजे 10 नवंबर को आएंगे।

अब तक दो चरणों में बिहार विधानसभा की कुल 243 में से 165 सीटों पर मतदान संपन्न हो चुका है। दूसरे चरण की वोटिंग के बाद विपक्षी महागठबंधन ने 94 में से 65 सीट पर जीत का दावा किया है। मतदान के बाद राजद, कांग्रेस, वामदल के नेताओं ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस कर यह दावा किया। राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि पहले चरण के मतदान में महागठबंधन के पक्ष में जो हवा चली उसने अब आंधी बन गई है। वहीं दूसरी ओर एनडीए नेताओं ने भी एक बार फिर से अपनी सरकार की उम्मीद जताई है। बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने दावा किया प्रदेश के लोगों ने तय कर लिया है कि उन्हें सुशासन चाहिए। बिहार के लोगों ने जाति और धर्म से ऊपर उठकर प्रदेश की उन्नति के लिए मतदान किया है। बहरहाल, अब तक दो चरणों में उम्मीद से कम मतदान होने से कुछ भी अनुमान लगाना कठिन हो गया है। आम तौर पर बदलाव के लिए भारी मतदान को बड़ा कारण माना जाता रहा है। इसके विपरीत चुनावी सभाओं में जुटती भीड़ के मद्देनजर वोट कम पड़ रहे हैं। दूसरे चरण में सबसे ज्यादा 52 सीटों पर राजद, जबकि 44-44 पर भाजपा और लोजपा चुनाव लड़ रही है। जदयू के 43 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।

दूसरे चरण में ग्रामीण इलाकों में मतदान के दौरान अधिक उत्साह दिखा। शहरी इलाकों में खासतौर पर पटना में उदासीनता दिखी। इस चरण में महागठबंधन में मुख्यमंत्री पद के चेहरे तेजस्वी यादव समेत राजद की 27 विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर है। उधर, एनडीए के आधा दर्जन मंत्रियों समेत कई प्रमुख उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला इसी चरण में होना है। एनडीए की 50 मौजूदा सीटों पर भाजपा और जदयू की प्रतिष्ठा दांव पर है। दूसरे चरण में भाजपा की राजद के साथ 27 सीटों पर सीधी टक्कर है। भाजपा की कांग्रेस के साथ 12 सीटों पर और माकपा के साथ एक, भाकपा के साथ दो और माले से दो सीटों पर मुकाबला है। इसी प्रकार जदयू अपनी 43 सीटों में सबसे अधिक राजद के साथ 25 सीटों पर आमने-सामने है। कांग्रेस के साथ 12 सीटों पर, माले के साथ दो, माकपा के साथ तीन और भाकपा के साथ एक सीट पर सीधे मुकाबले में है।
बता दें कि पिछली बार के चुनाव में जदयू राजद के साथ महागठबंधन में था। तब उसे उन 30 सीटों पर जीत मिली थी, जिनपर दूसरे चरण में मतदान हुए हैं। इस बार राजद से अलग होकर जदयू एनडीए में है। ऐसे में जदयू के लिए जीती हुई सीटों को बचाना और बाकी पर बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती है। पिछली बार जदयू को शिवहर, बेलसंड, फुलपरास, कुशेश्वरस्थान, बेनीपुर, हायाघाट, कुचायकोट, विभूतिपुर, महनार, हथुआ, जीरादेई, बरहरिया, एकमा, महाराजगंज, वैशाली, हसनपुर, चेरिया बरियारपुर, तेघड़ा, मटिहानी, नाथनगर, अस्थावां, राजगीर, इस्लामपुर, नालंदा, हरनौत और फुलवारीशरीफ में जीत मिली थी। इस बार चिराग पासवा की पार्टी लोजपा जदयू को कम से कम 11 सीटों पर नुकसान पहुंचाती दिख रही है। इनमें तेघड़ा, मटिहानी, चेरिया बरियारपुर, साहेबपुरकमाल, भागलपुर, नाथनगर, गोपालपुर, हिलसा, राजगीर, अस्थावां के अलावा नीतीश के गृहक्षेत्र हरनौत शामिल है।

चुनाव के दूसरे चरण में लीची के लिए मशहूर मुजफ्फरपुर, माछ-मखान और पोखर के लिए प्रतिष्ठित दरभंगा और मधुबनी के साथ-साथ सीता मैया के नैहर सीतामढ़ी में भी वोटिंग हुई। पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2015 में इन चारों जिलों की 39 सीटों में से राजद को 16, जदयू को नौ, भाजपा को आठ, कांग्रेस को तीन, रालोसपा को एक और निर्दलीय को दो सीटें मिली थीं। मुजफ्फरपुर की 11 सीटों में से राजद के पांच, भाजपा के तीन और दो निर्दलीय जीते थे। दरभंगा की 10 सीटों में से राजद और जदयू चार-चार तो भाजपा दो सीटों पर विजयी हुई थी। मधुबनी की 10 सीटों में से राजद ने चार, जदयू तीन, भाजपा, कांग्रेस और रालोसपा ने एक-एक सीट जीती थी। इसी तरह सीतामढ़ी जिले की आठ सीटों में राजद तीन, भाजपा और जदयू दो-दो और कांग्रेस को एक सीट पर जीत मिली थी। दूसरे चरण में मुजफ्फरपुर की 11 सीटों में से पांच और दरभंगा की दस में से पांच सीटों पर मतदान संपन्न हो गया।

इस चरण में जो चर्चित चेहरे मैदान में हैं, उनमें बाहुबली नेता आनंद मोहन के पुत्र चेतन आनंद और पूर्व सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा के पुत्र लव सिन्हा भी हैं। जदयू के दो मंत्रियों की किस्मत का फैसला भी मंगलवार को ही हो गया। नालंदा सीट से श्रवण कुमार जबकि हथुआ से रामसेवक सिंह मैदान में हैं। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी के पुत्र फराज फातमी, हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य के पुत्र कौशल किशोर भी मैदान में हैं। राघोपुर सीट पर सीधी लड़ाई राजद बनाम भाजपा है। इस सीट से महागठबंधन की ओर से सीएम पद के उम्मीदवार और राजद नेता तेजस्वी यादव चुनावी रण में हैं। उनकी सीधी टक्कर इस सीट पर भाजपा के सतीश राय से है। लालू के बड़े लाल यानी तेजप्रताप यादव ने इस बार अपनी सीट बदल ली है। वह इस बार हसनपुर जदयू के राजकुमार राय से सीधा मुकाबला कर रहे हैं। उधर, सारण जिले की परसा सीट से लालू के समधी चंद्रिका राय इस बार राजद छोड़कर जदयू से मैदान में हैं। उनका मुकाबला राजद के छोटेलाल राय से है। बिहार की राजनीति में नई सनसनी बनकर उभरीं प्लूरल्स पार्टी की पुष्पम प्रिया चौधरी भी दूसरे चरण में ही मैदान में हैं। पटना की बांकीपुर सीट से पुष्पम का मुकाबला शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा और भाजपा के निवर्तमान विधायक नितिन नवीन से है।

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