बिहार में बिछेगा बाइपास का जाल, दरभंगा में तीन तो मधुबनी में चार

पटना। तीन वर्षों में ही बिहार में ट्रैफिक व्यवस्था महानगरों की तरह हो सकती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस दिशा में बड़े बड़े फैसले किए हैं। उन्होंने शहरी क्षेत्रों में कुल 708 किलोमीटर लंबी 120 बाइपास सड़कों के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इनमें से तीन जहां दरभंगा में बनेंगे, वहीं चार बाइपास मधुबनी के लिए तय हुए हैं। सबसे अधिक 11 बाइपास बेगूसराय में बनाए जाएंगे। इनके अलावा पटना और समस्तीपुर, पू. चंपारण, खगड़िया, औरंगाबाद और गया में तीन-तीन, पूर्णिया, गोपालगंज,वैशाली, रोहतास और सारण में पांच-पांच, तो सहरसा, नालंदा, कटिहार और मधेपुरा में चार-चार बाइपास बनेंगे। इसी तरह सीतामढ़ी, शिवहर, पश्चिम चंपारण, मुंगेर, सिवान में एक-एक बाइपास बनाने का फैसला हुआ है। मुजफ्फरपुर, बांका, जमुई, किशनगंज, अररिया, शेखपुरा और सुपौल के हिस्से एक-एक बाइपास ही आया है।

पथ निर्माण विभाग की योजना के तहत तीन वर्षों में सारे बाइपास बना देने की बात कही गई है। कोई भी बाइपास सात मीटर से कम चौड़ाई में नहीं बनेगा। बता दें कि इतने सारे बाइपास बनाने का काम मुख्यमंत्री के सात निश्चय-दो की सुलभ संपर्कता योजना में है। राज्य सरकार ने बताया है कि सड़कों के निर्माण पर 4,154 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से इस बात का ध्यान रखने को कहा कि बाइपास सड़कों के निर्माण के लिए क्षेत्रों का चयन करते समय कम से कम भूमि अधिग्रहण होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शहर के अंदर भी फ्लाईओवर बनाने का कार्य करें। इससे यातायात सुगम होगा और लोगों को जाम से निजात मिलेगी।

इसके साथ-साथ मुख्यमंत्री ने पटना से सटे दानापुर कैंट का बाइपास और जेपी सेतु के समानांतर चार लेन के पुल बनाने की दिशा में तेजी से काम करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री को पथ निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने ‘सुलभ संपर्कता योजना’ से संबंधित एक प्रेजेंटेशन भी दिखाया। इसमें शहरी क्षेत्रों में बाइपास या फ्लाइओवरों के निर्माण के संबंध में विस्तृत जानकारी थी। उन्होंने प्रस्तावित एम्स-नौबतपुर की सहायक टू-लेन सड़क का निर्माण, ओपीआरएमसी-2 (आउटपुट एंड परफॉर्मेंस बेस्ट रोड एसेट्स मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट), रोड ओवरब्रिज, दानापुर कैंट बाइपास और पथ निर्माण विभाग के अन्य कार्यों के संबंध में भी जानकारी दी। कहा कि ग्रामीण कार्य विभाग और नगर निकायों के वैसे पथों को भी चिह्नित किया गया है, जिन्हें बाइपास के रूप में विकसित किया जा सकेगा।

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