अजीत शर्मा बने कांग्रेस विधायक दल के नेता, बैठक में मारपीट

पटना। दीपावली की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को बिहार कांग्रेस के अंदर ही खूब पटाखे फूटे। चुनाव परिणामों से बुरी तरह हतोत्साहित कांग्रेसी एक-दूसरे से ही भिड़ गए। सदाकत आश्रम गाली-गलौज से लेकर मारपीट तक का गवाह बना। यह सब हुआ विधायक दल की बैठक में। शुरुआत हुई बिक्रम के नव निर्वाचित विधायक सिद्धार्थ सिंह को विधायक दल का नेता बनाने की मांग से। इस पर विधायक विजय शंकर दुबे के समर्थकों ने उन्हें चोर कह दिया। हंगामा करते हुए वे अपने विधायक जी को विधायक दल का नेता बनाने की मांग करने लगे। देखते ही देखते दोनों पक्षों में हाथापाई शुरू हो गई। खूब लात-घूंसे चले। यह सब होता देख बैठक में मौजूद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस स्क्रीनिंग कमिटी के चेयरमैन अविनाश पांडे कोने में चले गए। किसी तरह हालात संभलने के बाद अजीत शर्मा को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुन लिया गया। वह भागलपुर से चुन कर आए हैं। हालांकि पहले कांग्रेसियों ने हमेशा की तरह एक बार फिर विधायक दल का नेता चुनने के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को अधिकृत कर दिया था। लेकिन उन्होंने बघेल से नाम जानने के बाद इसकी घोषणा वहीं कर देने का निर्दश दिया। इस बीच, बैठक में कांग्रेस के जीते 19 विधायकों में से दो के गैरहाजिर रहने पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अनुपस्थित विधायकों में मनिहारी के मनोहर प्रसाद और अररिया के हबीबुर्रहमान थे।

बहरहाल, अजीत शर्मा के कांग्रेस विधायक दल के नेता चुने जाने के साथ उनके डिप्टी की भी घोषणा हो गई। मो० अफाक आलम जहां कांग्रेस विधायक दल के उपनेता होंगे, वहीं राजेश कुमार राम को मुख्य सचेतक बनाया गया है। छत्रपति यादव और प्रतिमा कुमारी दास को उप सचेकत बनाया गया है। विधायक आनंद शंकर को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। बता दें कि अजीत शर्मा इस बार कांटे की टक्कर में भागलपुर से जीत कर आए हैं। उन्होंने भाजपा के रोहित पांडे को 1113 वोटों से हराया था। पार्टी ने उन्हें विधायक दल का नेता सवर्ण मतदाताओं को खुश करने के मकसद से बनाया है। विधायक दल का नेता बनते ही अजीत शर्मा ने कहा-मैं सोनिया गांधी जी को और राहुल गांधी जी को धन्यवाद देता हूं। मैं बिहार की जनता के लिए विकास का काम करूंगा। मैं सदन में कांग्रेस को आगे बढ़ाने का काम करूंगा।

इससे पहले दिन में हंगामे के बीच कुछ कार्यकर्ताओं ने विजय शंकर दुबे पर कांग्रेस की जमीन बेच देने का आरोप लगाया। इसके जवाब में विजय शंकर दुबे ने कहा कि कोई किसी की जमीन कैसे बेच सकता है। कोर्ट ने राजेंद्र स्मारक समिति के पक्ष में फैसला दिया था। 10-15 वर्षों तक कांग्रेस ने इसका मुकदमा लड़ा। इसलिए जो भी हुआ, वह कोर्ट के फैसले के बाद हुआ। इसलिए इस तरह का आरोप उन्हें बदनाम करने के लिए लगाए जा रहे हैं। बहरहाल, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसी तरह हंगामे को शांत किया। इसके बाद आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। कांग्रेस के जीते 19 विधायकों में से दो की गैरहाजिरी को दबाने की पूरी कोशिश की गई। बता दें कि मनिहारी के विधायक मनोहर प्रसाद और अररिया के हबीबुर्रहमान बैठक में शामिल नहीं हुए। पार्टी नेताओं का कहना है कि उन्हें शुक्रवार की बैठक की जानकारी नहीं थी। इसलिए नहीं आ पाए। जबकि दोनों एक दिन पहले ही हुई बैठक में थे। उसी बैठक में शुक्रवार को विधायक दल की बैठक का फैसला हुआ था। जब यह बात लोगों को हजम नहीं हुई, तो दोनों को अस्वस्थ बता दिया गया। ऐसे में कई तरह की अटकलें चल पड़ी हैं।

गौरतलब है कि चुनाव में बुरी तरह से हार के बाद कांग्रेस में कलह बढ़ती ही जा रही है। हर दिन नेता एक-दूसरे के खिलाफ नेता बयान दे रहे हैं। कई ने तो कांग्रेस नेताओं पर टिकट बेचने तक का आरोप लगाए हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन सिर्फ 19 सीटों पर ही जीत पाई। एक दिन पहले तारिक अनवर ने भी बिहार कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल उठाया था और कहा था कि यहां पर नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत है। इस सिलसिले में प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा पर के कमजोर नेतृत्व पर जमकर निशाने साधे जा रहे हैं।

रवीश के भाई को बार-बार टिकट क्यों-

विधायक दल की बैठक में भी पैसे लेकर टिकट बांटने के आरोप लगाए गए। पटना आए कई लोग स्थानीय नेताओं को दरकिनार कर बाहरी प्रत्याशियों को थोपने की बात कर रहे थे। पूर्वी चंपारण से आए एक ने गोविंदगंज के कांग्रेसी नेता नीलेश किशोर को टिकट देने पर सवाल खड़े कर दिए। कहा कि कांग्रेस गोविंदगंज से ब्रजेश पांडे को बार-बार इसलिए टिकट देती है, क्योंकि वह पत्रकार रवीश कुमार के भाई हैं। जबकि पिछले चुनाव में मामूल अंतर से हारे नेताओं के टिकट काट दिए जाते हैं। लेकिन ब्रजेश पांडेय 25-30 हजार वोट से हार कर भी टिकट पा जाते हैं।

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