बिहार विधानसभा में ओवैसी के विधायक को हिंदुस्तान पर आपत्ति

पटना। सोमवार को 17वीं बिहार विधानसभा का पहला सत्र शुरू हो गया। पहले दिन राज्य कैबिनेट के कुल आठ मंत्रियों समेत 191 विधायकों को सदन के सदस्यता की शपथ दिलाई गई। बाकी बचे 52 सदस्य अब मंगलवार को शपथ लेंगे। सुबह विधानसभा की बैठक में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सबसे पहले पहुंचने वालों में थे। इसके बाद मुख्यमंत्री सीधे प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी से मिलने पहुंचे और औपचारिक मुलाकात करते हुए उन्हें बुके दिया। सदन में पहले जहां नीतीश कुमार के साथ सुशील मोदी नजर आते थे, वहां अब तारकिशोर प्रसाद दिख रहे हैं। 27 नवंबर तक चलने वाले इस सत्र में विधानसभा में चुने गए नए सदस्यों को शपथ दिलाने की प्रक्रिया चलेगी। 25 नवंबर को विधानसभा स्पीकर का चुनाव होगा। 26 नवंबर को राज्यपाल का संयुक्त अभिभाषण सेंट्रल हॉल में होगा। 27 नवंबर को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा की जाएगी। बिहार विधानसभा में इस बार विपक्ष की उपस्थिति भी काफी दमदार रहेगी। विपक्षी महागठबंधन के 110 विधायक चुनकर सदन में पहुंचे हैं। विपक्ष रोजगार से लेकर गरीबी तक के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है तो सत्तापक्ष सवालों की काट के लिए तैयार दिख रहा है।

सोमवार को जब विधायकों को शपथ दिलाई जा रही थी, तब असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के विधायक अख्तरुल इमान ने हंगामा खड़ा कर दिया। उन्होंने ‘हिंदुस्तान’ बोलने से इंकार कर दिया। इसकी जगह उन्होंने ‘भारत’ का इस्तेमाल किया। विधायक की बात सुन शपथ दिला रहे प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी भी हैरान हो गए। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। हिंदुस्तान शब्द का इस्तेमाल बहुत पहले से ही होता आ रहा है, लेकिन इसका विधायक पर कोई असर नहीं पड़ा। वह अपनी बात पर अडे रहे। विधायक ने कहा कि हिंदी भाषा में भारत के संविधान की शपथ ली जाती है। मैथिली में भी हिंदुस्तान की जगह भारत शब्द का ही इस्तेमाल होता है, लेकिन उर्दू में शपथ लेने के लिए जो पत्र मुहैया कराया गया है उसमें भारत की जगह हिंदुस्तान शब्द का इस्तेमाल किया गया है। विधायक ने कहा कि वह भारत के संविधान की शपथ लेना चाहते हैं ना कि हिंदुस्तान के संविधान की। इससे भाजपा विधायक भड़क गए। भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि जो लोग हिंदुस्तान शब्द को बर्दाश्त नहीं कर सकते उन्हें भारत में रहने का हक नहीं है। ऐसे लोगों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए। एआईएमआईएम विधायकों के इस व्यवहार का विरोध जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) ने भी किया। बता दें कि उर्दू में शपथ लेने वाले विधायकों में जोकीहाट से शाहनवाज आलम, बहादुरगंज से मोहम्मद अंजार नईमी, ठाकुरगंज से मोहम्मद सऊद आलम, बायसी से सैयद रुकनुद्दीन, अमौर से अख्तरुल इमान, कोचाधामन से एम. इजहार थे। वैसे दो विधायकों ने अंग्रेजी में भी शपथ ली। ये थे- शिवहर से चेतन आनंद और सिमरी बख्तियारपुर से युसूफ सलाउद्दीन।

संस्कृत और मैथिली में भी शपथ-

नवनिर्वाचित विधायकों में से तीन ने संस्कृत में शपथ ली। इनमें प्रमुख थे कदमा से कांग्रेस विधायक शकील अहमद खान। इनके अलावा सोनबरसा से चुनकर आए रत्नेश श्रद्धा और सीतामढ़ी के विधायक मिथिलेश कुमार ने भी संस्कृत में शपथ ली। मैथिली में शपथ लेने वालों में हरलाखी के विधायक सुधांशु शेखर, बेनीपट्टी से विनोद नारायण झा, खजौली से अरुण शंकर प्रसाद, बिस्फी से हरिभूषण ठाकुर, झंझारपुर से नीतीश मिश्र, सहरसा से आलोक रंजन, गौड़ाबौराम से स्वर्णा सिंह, बेनीपुर से विनय चौधरी, अलीनगर से मिश्रीलाल यादव, दरभंगार शहर से संजय सरावगी, हायाघाट से रामचंद्र शाह, केवटी से मुरारी मोहन झा, मधुबनी से समीर कुमार महासेठ और सिंघेश्वर से चंद्रहास चौपाल।

डिप्टी सीएम ने ली सबसे पहले शपथ-

विधानसभा में सदस्यता की शपथ सबसे पहले उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, फिर दूसरी उपमुख्यमंत्री रेणु देवी, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, परिवहन मंत्री शीला कुमारी, कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह, पीएचईडी मंत्री रामप्रीत पासवान और राजस्व व भूमि सुधार मंत्री रामसूरत राय ने शपथ ली। सदन में अनुपस्थित रहने के कारण मंत्री जीवेश कुमार अब मंगलवार को शपथ लेंगे। वैसे पहले दिन जिन्होंने शपथ ली, उनमें राघोपुर से चुनाव जीतने के बाद लालू के छोटे लाल तेजस्वी यादव भी थे। वहीँ बड़े भाई तेज प्रताप यादव ने भी हसनपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतने के बाद सदन की सदस्यता की शपथ ली। उधर, दरभंगा के केवटी से पहली बार चुने गए मुरारी मोहन झा कमल की डिजाइन वाली मिथिला पाग पहने पहुंचे, तो पूर्व मंत्री संजय झा विंटेज लुक वाली कार में आए। पहली बार जमुई से चुनकर विधानसभा पहुंची श्रेयसी सिंह काफी उत्साहित दिखीं। उन्होंने कहा कि जिस तरह निशानेबाजी में देश का नाम रोशन किया है, उससे दोगुनी ऊर्जा से राजनीति में काम करूंगी। जनता की उम्मीदों पर खरी उतरूंगी।

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