महागठबंधन में दरार, राकांपा बाहर

नई दिल्ली। यूपीए की सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को बिहार में फिर किसी ने नहीं पूछा। 2015 की तरह इस बार भी पार्टी विपक्षी महागठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ेगी। यह जानकारी राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने मंगलवार को दी। उन्होंने कहा कि राकांपा महागठबंधन का हिस्सा होना चाहती थी, लेकिन हमें किसी ने भाव ही नहीं दिया, लिहाजा अकेले चुनाव लड़ेंगे। हम पहले भी कांग्रेस-राजद के साथ रहे हैं, फिर भी हमें सीट नहीं मिली। सूत्रों के मुताबिक, राकांपा बिहार में 40 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।

पटेल ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता अहमद पटेल, शक्ति सिंह गोहिल और राजद नेता तेजस्वी यादव से बात की, लेकिन कांग्रेस को हमारे लिए कुछ छोड़ना सही नहीं लगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राकांपा ने 243 में से केवल पांच सीटें ही मांगी थी। बता दें कि 2015 में पार्टी ने मित्र दलों से 12 सीटें मांगी थीं। लेकिन महज तीन सीटें मिलने के कारण राकांपा अलग हो गई थी। तब बिहार में तारिक अनवर पार्टी के बड़े नेता थे, जो अब कांग्रेस में हैं।

महाराष्ट्र विकास अघाड़ी का हिस्सा रही शिवसेना ने भी बिहार में 50 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का एलान किया है। पार्टी ने नए सिंबल के लिए चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। शिवसेना के साथ गठबंधन पर राकांपा नेता ने कहा,’बिहार में स्थिति अलग है। यहां शिवसेना के साथ गठबंधन संभव नहीं है। हमारे स्थानीय कार्यकर्ता चाहते हैं कि हम अकेले चुनाव लड़ें।’

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