अंबानी कार कांड में वाजे ने सब उगला, अब सीबीआई पढ़ेगी वसूली की डायरी

नई दिल्ली। मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटकों से भरी कार खड़ी करने के मामले में मुंबई पुलिस के निलंबित अधिकारी सचिन वाजे की एनआईए हिरासत शुक्रवार को खत्म हो गई। अब उसे 23 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। यह फैसला मुंबई की एनआईए अदालत ने सुनाया। इसके साथ ही अदालत ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ की वसूली के आरोपों की जांच में सीबीआई को एनआईए की मदद लेने की भी अनुमति दे दी। वैसे सीबीआई ने इसके लिए वाजे की हिरासत भी मांगी है। इस पर फैसला बाद में होगा। अपनी अर्जी में सीबीआई ने एनआईए से वाजे की वह डायरी मांगी है, जिसमें पैसों की लेन-देन का हिसाब है। यह डायरी क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) के एक लॉकर से मिली थी। वैसे एनआईए को वाजे की महिला मित्र से भी एक डायरी मिली है।

अंबानी कार कांड में एनआईए ने सचिन वाजे को 13 मार्च को गिरफ्तार किया था। तब से वह एनआईए की हिरासत में ही था। इस दौरान उसे मनसुख हिरेन की हत्या में भी शामिल पाया गया। इस लिहाज से शुरू हुई दोहरी जांच में एनआईए ने सचिन वाजे से काफी कुछ उगलवा लिया है। अब उसे वाजे की जरूरत नहीं है। इसलिए शुक्रवार को उसे अपनी हिरासत में मांगने पर जोर नहीं दिया। बता दें कि  अंबानी के घर के बाहर खड़ी की गई स्कॉर्पियो के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या की जांच पहले एटीएस कर रही थी। उसने हत्या के आरोप में पूर्व कांस्टेबल विनायक शिंदे और क्रिकेट बुकी राजेश गोरे को गिरफ्तार किया था। शिंदे और गोरे 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में है। इस बीच, मनसुख हत्याकांड में एनआईए ने पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा से भी दो दिनों तक पूछताछ की। बताया जाता है कि इस हत्याकांड के दौरान वाजे मुंबई पुलिस में अपने शुरुआती गुरु रहे प्रदीप शर्मा के संपर्क में था। प्रदीप शर्मा भी मुंबई पुलिस की नौकरी छोड़कर शिवसेना में शामिल हुए थे। 2019 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना ने उन्हें ठाणे से टिकट भी दिया था, लेकिन वह हार गए। 

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