त्योहार पर भी नहीं मिला रिजर्व बैंक से गिफ्ट, 4 फीसद रेपो रेट बरकरार

नई दिल्ली। त्योहारी सीजन से पहले रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति के फैसलों का एलान हो गया है। कोरोना काल में ग्राहकों को रिजर्व बैंक से झटका ही लगा है। इसलिए कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। जबकि ग्राहकों को इसकी वजह से ईएमआई में कटौती की उम्मीद थी। रिजर्व बैंक के गर्वनर शक्तिकांत दास ने साफ कहा है कि रेपो दर पहले की तरह चार प्रतिशत ही रखी गई है। रिवर्स रेपो को भी 3.35 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। हालांकि डिमांड बढ़ाने के लिए रेपो रेट पर कैंची चलने की उम्मीद थी। बता दें कि इससे पहले अगस्त में भी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया था।

फैसले की जानकारी शुक्रवार को रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने दी। उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के लिये उदार रुख को बनाये रखेगा। नरम रुख से कोविड-19 से प्रभावित अर्थव्यववस्था को गति देने के लिए जरूरत पड़ने पर नीतिगत दरों में कटौती की जा सकती है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में 9.5 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। रिजर्व बैंक ने आर्थिक गतिविधियों में आवास क्षेत्र के महत्व को देखते हुए होम लोन पर बैंकों के जोखिम संबंधी प्रावधानों में ढील देने का फैसला किया है। इससे बैंकों को पूंजी का प्रावधान कम करना होगा। फिर वे अधिक आवास लोन देने के लिए प्रोत्साहित होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2022 तक मंजूर किए जाने वाले सभी आवास ऋणों के लिए अब केवल कर्ज की राशि और आवासीय संपत्ति के मूल्य के अनुपात (एलटीवी) की कसौटी ही लागू होगी। अब आवासीय संपत्ति मूल्य के 80 प्रतिशत तक के कर्ज पर बैंकों के लिए 35 प्रतिशत जोखिम भारांक के आधार पर पूंजी का प्रावधान रखना होगा। इसी तरह 90 प्रतिशत तक के कर्ज के लिए जोखिम मानक 50 प्रतिशत भारांक के अनुसार पूंजी रखनी होगी।

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