चीन सीमा के नजदीक राजनाथ ने की शस्त्र पूजा

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विजयादशमी पर रविवार को सिक्किम के शेरतांग में चीन सीमा के करीब शस्त्र पूजा की। इस मौके पर हथियारों की पारंपरिक पूजा की गई। इस दौरान सैन्य अधिकारी और जवान भी उपस्थित थे। शस्त्रों, उपकरणों और हथियारबंद वाहनों की पूजा-अर्चना के दौरान पुजारियों ने मंत्रोच्चार किया। पूजा के अंत में भारतीय सीमाओं की सुरक्षा को लेकर प्रार्थना की गई। शेरतांग चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से महज दो किलोमीटर दूर है। भारत की सीमा के पास शस्त्र पूजा ऐसे समय पर की गई है जब पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध जारी है।

इस मौके पर रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना के जवानों से भेंट करके उन्हें हमेशा बेहद खुशी होती है। उनका मनोबल बहुत ऊंचा रहा है। इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है। चीन से तनाव पर रक्षा मंत्री ने कहा, भारत चाहता है कि तनाव खत्म हो और शांति स्थापित हो। लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसी नापाक हरकतें होती हैं। हालांकि मैं पूरी तरह आश्वस्त हूं कि हमारी सेना भारत की एक इंच जमीन भी दूसरे के हाथ में नहीं जाने देगी। आगे जब भी इतिहास लिखा जाएगा तो भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम की गाथा को स्वर्ण अक्षरों में लिखेगा। बता दें कि राजनाथ दशहरा के मौके पर लंबे समय से शस्त्र पूजा के कार्यक्रम में भाग लेते रहे हैं। गृह मंत्री रहने के दौरान भी उन्होंने ऐसे कार्यक्रम में भाग लिया था। पिछले साल रक्षा मंत्री दशहरे के मौके पर फ्रांस पहुंचे थे, जहां उन्होंने भारत को मिलने वाले लड़ाकू विमान राफेल की शस्त्र पूजा की थी।

भागवत बोले- देश ने राम मंदिर के फैसले को स्वीकारा

विजयादशमी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कोरोना वायरस महामारी के नियंत्रण को लेकर सरकार की तारीफ की। कहा कि विश्व के अन्य देशों की तुलना में भारत संकट की इस परिस्थिति में अधिक अच्छे प्रकार से खड़ा हुआ दिखाई देता है। चीनी घुसपैठ का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि भारत के शासन, प्रशासन, सेना तथा जनता ने इस आक्रमण के सामने अड़ कर खड़े होकर अपने स्वाभिमान, वीरता का परिचय दिया है। यह भी कहा कि सीएए के खिलाफ देश में माहौल बनाया गया लेकिन कोरोना महामारी इसपर भारी पड़ी। उन्होंने बताया कि देश की एकात्मता और सुरक्षा के हित में ‘हिन्दू’ शब्द को आग्रहपूर्वक अपनाकर, उसके स्थानीय तथा वैश्विक, सभी अर्थों को कल्पना में समेटकर संघ चलता है। संघ जब ‘हिंदुस्तान हिन्दू राष्ट्र है’ कहता है तो उसके पीछे कोई राजनीतिक या सत्ता केंद्रित संकल्पना नहीं होती। वह इन सब विशिष्ट पहचानों को कायम, स्वीकृत व सम्मानित रखते हुए, भारत भक्ति के तथा मनुष्यता की संस्कृति के विशाल प्रांगण में सबको बसाने वाला, सब को जोड़ने वाला शब्द है। उन्होंने कहा कि कोरोना महमारी के चलते कई विषय दब गए। भारत में कोरोना से कम नुकसान हुआ। कोरोना से सावधान रहने के लिए कई नियम बनाए गए। 2019 में, अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी हो गया। फिर उच्चतम न्यायालय ने 9 नवंबर को अयोध्या पर फैसला दिया। संपूर्ण देश ने इस फैसले को स्वीकार किया। 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर की आधारशिला रखी गई। हमने इन घटनाओं के दौरान भारतीयों के धैर्य और संवेदनशीलता को देखा है।

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