‘मन की बात’ से किसानों को मनाने का प्रयास, पीएम ने समझाए नए कानून के फायदे

नई दिल्ली। केंद्र के नए कृषि कानून के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में किसानों को नए कृषि कानूनों के फायदे बताते हुए कहा कि इनसे ना सिर्फ किसानों के अनेक बंधन समाप्त हुए हैं, बल्कि उन्हें नए अधिकार और नए अवसर भी मिले हैं। उन्होंने कहा कि भारत में खेती और उससे जुड़ी चीजों के साथ साथ नए आयाम जुड़ रहे हैं। बीते दिनों हुए कृषि सुधारों ने किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं। बरसों से किसानों की जो मांग थी, जिन मांगों को पूरा करने के लिए किसी न किसी समय हर राजनीतिक दल ने उनसे वादा किया था, वे मांगें हमने पूरी की हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन अधिकारों ने बहुत ही कम समय में किसानों की परेशानियों को कम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे किसानों ने नए कृषि कानूनों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के धुले जिले के किसान जितेंद्र भोई जी ने मक्के की खेती की थी और सही दामों के लिए उसे व्यापारियों को बेचना तय किया। फसल की कुल कीमत तय हुई करीब 3 लाख 32 हजार रुपए। जितेंद्र भोई को 25 हजार रुपए एडवांस भी मिल गए थे। तय हुआ कि बाकी का पैसा उन्हें 15 दिनों में चुका दिया जाएगा। लेकिन बाद में परिस्थितियां ऐसी बनी कि उन्हें बाकी पेमेंट नहीं मिला। किसान से फसल लो, महानों-महीनों पेमेंट ना करो, शायद मक्का खरीदने वाले बरसों से चली आ रही उसी परंपरा को निभा रहे थे। इसी तरह चार महीने तक जितेंद्र का पेमेंट नहीं हुआ। इस स्थिति में सितंबर में पास हुए नए कृषि कानून उनके काम आए। इस कानून में यह तय किया गया कि फसल खरीदने के तीन दिन में ही किसान को पूरा पेमेंट करना पड़ता है। अगर पेमेंट नहीं होता है, तो किसान शिकायत दर्ज कर सकता है।

कृषि की पढ़ाई करने वालों से आग्रह-

इसी के साथ प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरा नौजवानों, विशेषकर कृषि की पढ़ाई कर रहे लाखों विद्यार्थियों से आग्रह है, कि वे अपने आस-पास के गावों में जाकर किसानों को आधुनिक कृषि के बारे में और हाल में हुए कृषि सुधारों के बारे में जागरूक करें। उन्होंने कहा कि काफी विचार विमर्श के बाद भारत की संसद ने कृषि सुधारों को कानूनी स्वरूप दिया। इन सुधारों से ना सिर्फ किसानों के अनेक बंधन समाप्त हुए हैं, बल्कि उन्हें नए अधिकार और नए अवसर भी भी मिले हैं।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री का यह बयान तब आया है, जब पंजाब और हरियाणा से बड़ी संख्या में किसान केंद्र द्वारा पास किए गए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार जब तक इन ‘काले कानूनों’ को वापस नहीं लेगी, वे वापस नहीं लौटेंगे। दिल्ली में घुसने को लेकर दिल्ली बॉर्डर पर पुलिस द्वारा किसानों पर वाटर कैनन और आसूं गैस के गोले दागकर उन्हें रोकने की कोशिश की गई। कई जगहों पर बोल्डर रखकर और गढ्ढे खोदकर भी किसानों को रोकने की कोशिश की गई लेकिन किसान नहीं माने। हालांकि उन्हें कई शर्तों के साथ दिल्ली के बुराड़ी इलाके में प्रदर्शन की इजाजत दी गई है, लेकिन किसान मानने को तैयार नहीं हैं। जबकि गृह मंत्री ने उन्हें बातचीत का आमंत्रण भी दिया है।

पराली पर दिया उदाहरण-

इसके अलावा मन की बात में प्रधानमंत्री ने पराली प्रबंधन की भी बात की। हरियाणा के कृषि उद्यमी वीरेंद्र का जिक्र किया। बताया कि पराली प्रबंधन को कैसे वीरेंद्र ने एक नई दिशा दिखाई है। वीरेंद्र ने पुआल की गांठ बनाने वाली स्ट्रॉ बैलर मशीन खरीदी। इसके लिए उन्हें कृषि विभाग से आर्थिक मदद भी मिली। इस मशीन से वीरेंद्र ने पराठी के गठ्ठे बनाने भी शुरू कर दिए। गठ्ठे बनाने के बाद इस पराली को एग्रो एनर्जी प्लांट और पेपर मील को बेच दिया। आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि वीरेंद्र ने पराली से सिर्फ दो साल में डेढ़ करोड़ से ज्यादा का व्यापार किया है। उसमें भी लगभग 50 लाख रुपए का मुनाफा कमाया है। यह एक अनोखा उदाहरण है, जिससे सभी को सीख लेनी चाहिए।

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