मोदी ने फिर गिनाए कृषि कानूनों के फायदे

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के हजारों किसानों से बात की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बात करते हुए उन्होंने नए कृषि कानूनों के लाभ गिनाए। कहा कि विपक्ष कृषि कानून को लेकर किसानों को गुमराह कर रहा है। पिछले छह महीने से कानून लागू हैं, लेकिन कोई शिकायत नहीं आई है। कहा कि ये कानून रातोंरात नहीं बने हैं। पिछले 22 सालों से हर सरकार ने इन पर विचार किया है। उन्होंने किसानों से अपील की कि यदि किसी को कोई आशंका है तो सिर झुकाकर और हाथ जोड़कर बात करने को तैयार हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, दुनिया के विकसित देशों में किसानों को मिल रही सुविधाओं को भारतीय किसानों को मुहैया कराने में देरी नहीं की जा सकती है। भारत में कृषि सेक्टर से पिछड़ापन दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। इस कड़ी में भंडारण की आधुनिक व्यवस्थाएं बनाई जा रही हैं। विपक्ष ने आठ साल तक स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों की दबाकर रखा। हमारी सरकार ने कमेटी की सिफारिशें लागू कर किसानों को लागत का डेढ़ गुना एमएसपी दिया।

एमएसपी पर किया जा रहा है गुमराह

समर्थन मूल्य प्रणाली यानी एमएसपी पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि सुधार के बाद एक सबसे बड़ा झूठ एमएसपी पर बोला जा रहा है। अगर हमें एमएसपी हटानी होती तो स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू ही क्यों करते। पिछली सरकार के पांच साल में किसानों को धान और गेहूं की एमएसपी पर खरीद के बदले 3 लाख 74 हजार करोड़ रुपए ही मिले थे। हमारी सरकार ने इतने ही साल में गेहूं और धान की खरीद करके किसानों को 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दिए हैं। यानी हमारी सरकार ने न सिर्फ एमएसपी में वृद्धि की, बल्कि ज्यादा मात्रा में किसानों से उनकी उपज को एमएसपी पर खरीदा है। इसका सबसे बड़ा लाभ ये हुआ है कि किसानों के खाते में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा पैसा पहुंचा है। यह इस बात का सबूत है कि हमारी सरकार एमएसपी समय-समय पर बढ़ाने को कितनी तवज्जो देती है, कितनी गंभीरता से लेती है।

मंडी सिस्टम अब भी जारी

उन्होंने कहा कि नए कानून के बाद एक भी मंडी बंद नहीं हुई है। फिर क्यों यह झूठ फैलाया जा रहा है? सच्चाई तो यह है कि हमारी सरकार एपीएमसी को आधुनिक बनाने पर, उनके कंप्यूटरीकरण पर 500 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर रही है। फिर यह एपीएमसी बंद किए जाने की बात कहां से आ गई। नए कानून में हमने सिर्फ इतना कहा है कि किसान चाहे मंडी में बेचे या फिर बाहर, यह उसकी मर्जी होगी। अब जहां किसान को लाभ मिलेगा, वहां वह अपनी उपज बेचेगा।

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से किसानों को लाभ

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में सिर्फ फसलों या उपज का समझौता होता है। जमीन किसान के ही पास रहती है। एग्रीमेंट और जमीन का कोई लेना-देना ही नहीं है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को लेकर बड़ा झूठ चल रहा है। जबकि देश के कई राज्यों में पहले से ही कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एग्रीमेंट चल रहे हैं। पंजाब की कांग्रेस सरकार ने हाल ही में ऐसा ही एक कॉन्ट्रैक्ट किया था। हमने अब इसमें बदलाव किया है। जोड़ा है कि किसान से कॉन्ट्रैक्ट करने वाली कंपनी को अपना वादा पूरा करना ही होगा। अगर कॉन्ट्रैक्ट करने वाले कंपनी का मुनाफा बढ़ेगा, तब भी किसान को फायदा होगा। अगर कोई गड़बड़ होती है, तो तुरंत एसडीएम से शिकायत कर किसान अपनी समस्या का हल निकलवा सकता है, कई किसान ऐसा कर भी चुके हैं।

विपक्ष पर करारा वार
मोदी ने विपक्ष को भी खूब आड़े हाथ लिया।उन्होंने कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया। कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में किसानों की सिर्फ एक बार ही कर्जमाफी की गई, वह भी 50 हजार करोड़। जबकि उनकी सरकार हर साल इससे अधिक पैसे किसानों के खाते में भेज रही है।

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