नए संसद भवन का रास्ता साफ, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

नई दिल्ली। दिल्ली में संसद की नई बिल्डिंग बनने का रास्ता साफ हो गया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज कर दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 दिसंबर को इसी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की नींव रखी थी।

जस्टिस एएम खानविल्कर की अध्यक्षता वाली पीठ ने पर्यावरण का हवाला देते हुए इस प्रोजेक्ट के खिलाफ दायर सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। हालांकि तीन जजों की पीठ ने यह जरूर कहा कि निर्माणकार्य से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जमीन का डीडीए की तरफ से लैंड यूज बदलना सही है। कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय द्वारा दी गई सिफारिशों को बरकरार रखा और निर्माण के दौरान पर्यावरण का ध्यान रखने की बात कही। शीर्ष अदालत ने निर्माण के दौरान स्मॉग टावर लगाने और निर्माण से पहले हेरिटेज कमिटी की मंजूरी जरूर ले लेने को कहा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सात दिसंबर को नए संसद भवन के लिए नींव रखने की अनुमति दे दी थी। तब यह भी निर्देश दिया था कि अंतिम निर्णय तक कोई निर्माण नहीं होगा। गौरतलब है कि सितंबर 2019 में इसकी घोषणा हुई थी। इसके तहत नया संसद भवन बनाया जाएगा, जो तिकोना होगा। इसमें 900 से 1,200 सांसदों के बैठने की क्षमता होगी। तय कार्यक्रम के मुताबिक इसका निर्माण अगस्त 2022 तक होना है। उस साल देश अपना 75 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा होगा। इसमें केंद्रीय सचिवालय का निर्माण 2024 तक करने की योजना है। केंद्र सरकार के मुताबिक, 20 हजार करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से पैसों से बर्बादी नहीं होगी। बल्कि सालाना करीब एक हजार करोड़ रुपये की बचत होगी, जो फिलहाल मंत्रालयों के किराए पर खर्च हो रहे हैं।

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