नए संसद भवन का भूमिपूजन, मोदी बोले- आत्मनिर्भर भारत का गवाह बनेगा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नए संसद भवन का भूमिपूजन किया। चार मंजिला नए संसद भवन का निर्माण कार्य भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ तक पूरा कर लिए जाने की संभावना है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन कार्यक्रम आरंभ हुआ और इसके संपन्न होने के बाद शुभ मुहुर्त में प्रधानमंत्री ने परंपरागत विधि विधान के साथ नींव रखी। इस कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, कैबिनेट मंत्री और विभिन्न देशों के राजदूत और उच्चायुक्त भी शामिल हुए। इसमें कुछ मुख्यमंत्री और राज्यपाल भी वर्चुअली जुड़े। नए संसद भवन का निर्माण 971 करोड़ रुपए की लागत से 2022 तक पूरा होने की संभावना है।

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद का नया भवन आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का गवाह बनेगा और 21वीं सदी के भारत की आकांक्षाएं पूरी करेगा। उन्होंने कहा- आज का दिन बहुत ही ऐतिहासिक है। हम भारत के लोग मिलकर अपनी संसद के इस नए भवन को बनाएंगे। इससे सुंदर क्या होगा, इससे पवित्र क्या होगा कि जब भारत अपनी आजादी के 75 वर्ष का पर्व मनाए, तो उस पर्व की साक्षात प्रेरणा, हमारी संसद की नई इमारत बने। प्रधानमंत्री ने कहा कि अपने जीवन में वह क्षण कभी नहीं भूल सकता जब 2014 में पहली बार एक सांसद के तौर पर मुझे संसद भवन में आने का अवसर मिला था। तब लोकतंत्र के इस मंदिर में कदम रखने से पहले मैंने सिर झुकाकर लोकतंत्र के इस मंदिर को नमन किया था। कहा कि हमारे वर्तमान संसद भवन ने आजादी के आंदोलन और फिर स्वतंत्र भारत को घड़ने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। आजाद भारत की पहली सरकार का गठन भी यहीं हुआ और पहली संसद भी यहीं बैठी। वर्षों से नए संसद भवन की जरूरत महसूस की गई है। ऐसे में हम सभी का दायित्व है कि 21वीं सदी के भारत को एक नया संसद भवन मिले। इसी कड़ी में यह शुभारंभ हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा- आजादी के समय किस तरह से एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में भारत के अस्तित्व पर संदेह जताया गया था। अशिक्षा, गरीबी, सामाजिक विविधता सहित कई तर्कों के साथ ये भविष्यवाणी कर दी गई थी कि भारत में लोकतंत्र असफल हो जाएगा। हम गर्व से कह सकते हैं कि हमारे देश ने उन आशंकाओं को ना सिर्फ गलत साबित किया, बल्कि 21वीं सदी की दुनिया भारत को अहम लोकतांत्रिक ताकत के रूप में आगे बढ़ते देख रही है। पुराने संसद भवन ने स्वतंत्रता के बाद के भारत को दिशा दी, तो नया भवन आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का गवाह बनेगा। पुराने भवन में देश की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए काम हुआ, तो नए भवन में 21वीं सदी के भारत की आकांक्षाएं पूरी की जाएंगी। मोदी ने कहा कि भारत के लिए लोकतंत्र जीवन मूल्य है, जीवन पद्धति है, राष्ट्र जीवन की आत्मा है। भारत का लोकतंत्र, सदियों के अनुभव से विकसित हुई व्यवस्था है। भारत के लिए लोकतंत्र में, जीवन मंत्र भी है, जीवन तत्व भी है और साथ ही व्यवस्था का तंत्र भी है।

नए संसद भवन में होगी ऐसी व्यवस्था-

नया संसद भवन अत्यधिक सुविधा संपन्न होगा। संयुक्त सत्र के दौरान लोकसभा में बैठने की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी। इसके अलावा इसमें संसद सदस्यों के लिए लाउंज, पुस्तकालय, विभिन्न समितियों के लिए कक्ष, भोजन करने का स्थान और पार्किग के लिए पर्याप्त जगह होगी। नए भवन के लोकसभा चैंबर में 888 सदस्यों और राज्यसभा चैंबर में 384 सदस्यों के बैठने की क्षमता होगी। संयुक्‍त सत्र के दौरान लोकसभा कक्ष में 1224 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी। इसका डिजाइन अहमदाबाद के मैसर्स एचसीपी डिजाइन और मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने तैयार किया है। नई संसद का निर्माण टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड करेगी। नया संसद भवन 64500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बनाया जाएगा। इसका निर्माण कार्य भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ यानी 2022 तक तक पूरा कर लिया जाएगा। बताया जाता है कि नई संसद में हर सांसद को कार्यालय के लिए 40 वर्ग मीटर जगह दी जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *