कृषि मंत्री बोले- कानून में चिंता वाली बात दूर करेंगे, पर किसान कानून वापसी पर ही अड़े

नई दिल्ली। तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों का आंदोलन 15वें दिन भी जारी है। उन्हें मनाने के लिए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर गुरुवार को फिर आगे आए। पत्रकारों से बातचीत के जरिए किसानों तक अपनी बात पहुंचाई। इस दौरान इन कानूनों पर सरकार का पक्ष रखा। कहा कि किसानों की चिंता वाले प्रावधानों को दुरुस्त करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार किसानों की बेहतरी के लिए काम कर रही है। कृषि मंत्री के बाद किसानों ने भी पत्रकारों से बात की। इसमें किसान नेता बूटा सिंह ने कहा, अगर प्रधानमंत्री हमारी बात नहीं सुनते हैं और कानून वापस नहीं लेते हैं तो हम रेलवे ट्रैक जाम करेंगे। इसके बाद उत्तर रेलवे के चीफ पीआरओ ने कहा कि पंजाब में किसान आंदोलन के चलते कई ट्रेनें या तो रद्द रहेंगी या डायवर्ट रहेंगी।

कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि सरकार किसानों को मंडी की बेड़ियों से आजाद करना चाहती थी। ताकि वे अपनी उपज देश में कहीं भी, किसी को भी, अपनी कीमत पर बेच सकें। अभी कोई भी कानून यह नहीं कहता कि तीन दिन बाद उपज बेचने के बाद किसान को उसकी कीमत मिलने का प्रावधान हो जाएगा। लेकिन इस कानून में यह है। तोमर ने कहा कि हमने किसानों के पास एक प्रस्ताव भेजा था। लेकिन वे चाहते थे कि कानून वापस ले लिए जाएं। हम कह रहे हैं कि सरकार खुले दिमाग के साथ उन प्रावधानों पर बात करने के लिए तैयार है जिन पर आपत्ति है। ये कानून एपीएमसी या एमएसपी को प्रभावित नहीं करते हैं। हमने यह बात किसानों को समझाने की कोशिश की। एमएसपी चलती रहेगी। रबी और खरीफ की खरीद अच्छे से हुई है। एमएसपी को डेढ़ गुना किया गया है। खरीद की वॉल्यूम भी बढ़ाया गया है। एमएसपी के मामले में उन्हें कोई शंका है तो इसे लेकर हम लिखित में आश्वासन देने को तैयार हैं। वार्ता के दौरान कई लोगों ने कहा कि किसान कानून अवैध हैं क्योंकि कृषि राज्य का विषय है और केंद्र सरकार ये नियम नहीं बना सकती है। हमने स्पष्ट किया कि हमारे पास व्यापार पर कानून बनाने का अधिकार है और उन्हें इसके बारे में विस्तार से बताया।

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