टनल मिल जाने से चीन के सामने हम अटल

अटल जी की घोषणा और सोनिया की रखी नींव पर मोदी ने देश को समर्पित किया ऐतिहासिक टनल

नई दिल्ली। देश को मिल गया समुद्र तल से दस हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर बनी दुनिया की सबसे लंबी 9.02 किलोमीटर की अटल टनल। शनिवार को यह शुभ कार्य हुआ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों। इससे छह महीने तक बर्फ की कैद में रहने वाले हिमाचल के जनजातीय बहुत जिले लाहुल-स्पीति के लोगों की राह रोहतांग दर्रा नहीं रोक सकेगा। चीन सीमा तक सैन्य वाहन और रसद भी आसानी से पहुंच सकेगा। पीर पंजाल की पहाड़ियों में बनी यह सुरंग लाहुल घाटी समेत चंबा जिले की किलाड़ व पांगी घाटी में विकास की नई गाथा लिखेगी। सुरंग से भारतीय सेना को भी मजबूती मिलेगी। सैन्य वाहनों को सीमा तक पहुंचने में कम समय लगेगा। सुरंग बन जाने से मनाली की लेह से 46 किलोमीटर दूरी कम हो जाएगी। बड़े वाहन चार घंटे के बजाय अब महज मात्र 45 मिनट में कोकसर पहुंच सकेंगे। इस सुरंग को बनाने की घोषणा अटल बिहारी वाजपेयी ने तीन जून 2000 को की थी। फिर 26 मई 2002 को उन्होंने सुरंग के साउथ पोर्टल तक बनने वाली सड़क की नींव भी रखी थी। लेकिन सुरंग की नींव जून 2010 में सोनिया गांधी ने रखी थी।

इसके निर्माण पर करीब चार हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था। लेकिन यह 3200 करोड़ रुपये में तैयार की गई है। फिर भी आठ सौ करोड़ की बचत हुई। हालांकि शुरू में लागत लगभग 1400 करोड़ रुपये ही आंकी गई थी। सुरंग के ठीक ऊपर स्थित सेरी नाला से पानी के रिसाव के कारण निर्माण में लगभग पांच साल की देरी हुई। बता दें कि सुरंग से अब 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन गुजर सकेंगे। 3000 वाहन प्रतिदिन दिन हो सकेंगे आर-पार। वाहन मोड़ने की सुविधा दो किलोमीटर के बाद है। इमरजेंसी निकास द्वार पांच सौ मीटर की दूरी पर है। इसमें एक किलोमीटर पर लगा है ट्रैफिक इंटेंसिटी डिटेक्शन सिस्टम।

इस मौके पर ने प्रधानमंत्री ने कहा- मेरा बहुत बड़ा सौभाग्‍य है जो अटल टनल के लोकार्पण का अवसर मिला। बतौर भाजपा प्रभारी हिमाचल से गहरा नाता रहा है। अटल जी जब प्रीणी स्थित आवास पर आते थे तो वह तबके मुख्‍यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से मिलते थे। धूमल जी हमेशा अटल जी से सुरंग निर्माण का आग्रह करते थे और बाद में यही प्रोजेक्‍ट उनका सपना बन गया। आज यह सपना पूरा हो गया। लाहुल के उत्‍पाद दिल्ली तक पहुंचेंगे। टनल से देश को नई ताकत मिलेगी। देश की सुरक्षा व समृद्धि का बड़ा जरिया है। 2013 तक मात्र डेढ़ किलोमीटर का काम हुआ था। ऐसे काम चलता रहता तो 2040 तक पूरा होता। इसमें तेजी आई तब जब 2014 हम सत्ता में आए। 300 मीटर की जगह टनल बनाने की रफ्तार 1300 मीटर प्रति वर्ष हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा मोदी ने हमेशा अटल टनल की चिंता की। अनुमानित लागत पर काम पूरा किया, बीआरओ बधाई का पात्र है। जब टनल बननी थी तो मोदी हिमाचल के प्रभारी थे और आज प्रधानमंत्री के रूप में शुभारंभ कर रहे हैं। यह संजोग बहुत सुखद है। प्रधानमंत्री ने टनल के लोकार्पण के बाद अंदर जाकर अकेले भ्रमण किया। इसके बाद बीआरओ के डीजी से सुरंग के बारे में जानकारी ली। प्रदर्शनी भी देखी। फिर खुली जीप में सवार होकर टनल का भ्रमण किया।

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इसलिए महत्वपूर्ण है यह सुरंग

-यह सुरंग लाहुल के लोगों सहित सेना को भी बल देगी।

-चीन सीमा तक अब बहुत आसानी से पहुंच सकेंगे सैन्य वाहन व रसद।

-46 किलोमीटर कम होगी मनाली से लेह की दूरी।

-25 रुपये में सिस्सू से मनाली पहुंचेंगी आलू की बोरी। पहले लगता था 70 रुपये।

-एक दिन में ऊना से तांदी पहुंचेंगे रसोई गैस सिलेंडर। पहले लगते थे दो दिन।

-लाहुल के किसान मंडियों तक आसानी से पहुंचा सकेंगे सब्जियां। पहले रोहतांग दर्रा पर बर्फबारी के चलते खेतों में सड़ जाती थीं।

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