मध्य प्रदेश में लव जिहाद कानून के मसौदे पर कैबिनेट की मुहर

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश सरकार लव जिहाद के खिलाफ विधानसभा के शीतकालीन सत्र में धर्म स्वातंत्र्य बिल लाएगी। इसके प्रस्तावित मसौदे को शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई। यह जानकारी गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दी। उन्होंने बताया कि अधिनियम में सख्त प्रवधान किए गए हैं। इसका उल्लंघन करने पर अधिकतम 10 साल की कैद और एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रवधान किया गया है। कोई भी व्यक्ति लालच, धमकी, बल प्रयोग या कपटपूर्ण साधन से मत परिवर्तन कराता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

नए कानून के प्रावधानों में पीड़ित महिला और पैदा होने वाले बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। बच्चे को पिता की संपत्ति में उत्तराधिकारी माना जाएगा। साथ ही अधिनियम के प्रावधानों के खिलाफ धर्म परिवर्तन कराने वाली संस्था या संगठन पर भी जुर्माना लगेगा। ऐसी संस्थाओं और संगठनों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा। वैसे मर्जी से धर्म परिवर्तन करने वाले और उसका धर्म परिवर्तन कराने वाले को जिलाधिकारी (डीएम) को 60 दिन पहले सूचना देनी ही होगी। धर्म परिवर्तन कराने वाला अगर 60 दिन पहले डीएम को सूचना नहीं देता है तो उसे तीन से पांच की कैद और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा।

कानून एक नजर में

-कम से कम एक साल और अधिकतम पांच साल तक कैद की सजा। इसके अलावा 25000 रुपए का जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

-महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति, जनजाति के धर्म में बदलाव करने पर कम से कम दो साल और अधिकतम 10 साल कैद की सजा और 50 हजार का जुर्माना।

-धर्म छिपाकर धर्म बदलने की कोशिश पर कम से कम तीन से लेकर अधिकतम 10 साल की कैद की सजा। साथ में 50 हजार रुपये का जुर्माना।

-सामूहिक धर्म परिवर्तन के दबाव पर पांच से दस साल की कैद की सजा और एक लाख तक का जुर्माना।

-एक से अधिक बार कानून का उल्लंघन करने पर पांच से दस साल कैद की सजा।

– पीड़ित महिला और पैदा हुए बच्चे को भरण-पोषण प्राप्त करने का अधिकार होगा।

– बच्चे को पिता की संपत्ति में उत्तराधिकारी के रूप में अधिकार बरकरार रखे जाने का प्रविधान भी शामिल किया गया है।

-पैतृक धर्म में वापसी को लेकर भी सरकार ने मसौदे में बिंदु को शामिल किया है। पैतृक धर्म वह माना जाएगा, जो जन्म के समय उसके पिता का धर्म था।

-धर्म परिवर्तन में संबंधित व्यक्ति के माता-पिता या भाई-बहन को थाने में शिकायत करनी होगी।

-इस कानून में दर्ज अपराध और गैरजमानती होगा। सुनवाई कोर्ट के द्वारा अधिकृत होगी।

-कानून में निर्दोष होने के सबूत देने की बाध्यता भी रखी गई है।

-इस कानून में विवाह को अमान्य करने का प्रावधान भी है। इसके लिए परिवार न्यायालय को भी अधिकृत किया गया है।

– मामले की जांच उपनिरीक्षक स्तर से नीचे का अधिकारी नहीं कर सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *