सुमदोरोन चू में चीनी सेना से भिड़ंत पर भिड़ गए दो पूर्व भारतीय जनरल

शरद, दरभंगा। भारत और चीन के बीच लद्दाख में चल रहे तनाव के बीच भारतीय सेना के दो पूर्व जनरलों के बीच जुलाई 1986 में अरुणाचल प्रदेश के सुमदोरोन चू में इसी तरह के तनाव में सेना और सरकार की भूमिका को लेकर एक नया विवाद छिड़ गया है। 1989 में सेना अध्यक्ष बने जनरल वीएन शर्मा ने दावा किया कि 1986 में भारतीय सेना को 5 किलोमीटर पीछे हटने के आदेश दिए गए थे और उन्होंने इन आदेशों को मानने से इंकार कर दिया था। उन्होंने दावा किया था कि या देश तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल के सुंदरजी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के निर्देश पर दिए थे।
लेकिन उस समय सुमदोरोन चू इलाके के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) रहे रिचर्ड खरे ने जनरल शर्मा के बयान को कपोल कल्पित करार दिया है। बाद में लेफ्टिनेंट जनरल बनकर सेवानिवृत्त हुए खरे का कहना है कि जनरल शर्मा इस घटना के समय अरुणाचल प्रदेश में तैनात ही नहीं थे। वे उस वक्त मध्यप्रदेश के महू में कॉम्बैट कॉलेज के कमांडेंट थे। “वे एक ऐसी ऐतिहासिक घटना में अपनी भूमिका तलाश कर रहे हैं जहां वे थे ही नहीं”, जनरल खरे ने कहा। घटना का ब्योरा देते हुए खरे ने कहा कि 12 जुलाई 1986 को कुछ चीनी सिपाही सुमदोरोन नदी की ओर से ऊपर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे।  पूर्वी कमान के जीओसी जनरल जेएम सिंह की इजाजत लेकर सीओ खरे ने तत्कालीन कंपनी कमांडर कैप्टन आरएमएस रावत को एक चेतावनी हवाई फायर के बाद चीनी सैनिकों को सीधे गोली मारने के आदेश दिए। चीनी अपने हथियार और साजो सामान छोड़कर बंकर में जा छिपे। अगले दिन सुबह जब आर्मी कमांडर जनरल सुंदरजी को इस बारे में सूचित किया गया तो उन्होंने पूछा कि क्या आप लोग युद्ध चाहते हो? सीओ खरे ने कहा – नहीं लेकिन हम चीनियों को भारतीय भूमि पर कब्जा करने की इजाजत भी नहीं दे सकते।

10 वर्ष तक चला तनाव
इस वर्ष लद्दाख में चीन के साथ हुए सीमा विवाद से पहले सुमदोरोन चू में ही दोनों देशों के बीच इसी तरह का तनाव हुआ था। चीन ने भारतीय सीमा में अतिक्रमण करने की कोशिश की थी। लेकिन सेना ने चीनियों की घुसपैठ को नाकाम कर दिया। लेकिन यह तनाव 1995 तक चला जब चीनी सेना पीछे जाने पर राजी हो गई।

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