किसान संगठनों से आज बात नहीं बनी तो फिर मुश्किल

नई दिल्ली। किसान संगठनों और सरकार के लिए सोमवार को सातवें दौर की बातचीत होगी। अगर इसमें बात नहीं बनी, तो आगे मुश्किल ही है। फिर तो 26 जनवरी को पूरी ताकत से राजधानी दिल्ली में किसान परेड निकालेंगे। इसलिए कृषि मंत्रालय में छुट्टी के बावजूद रविवार को उच्चस्तरीय बैठक हुई। कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर और रेल व वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने किसान संगठनों से वार्ता करने से पहले गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर चर्चा की।

सरकार के साथ सोमवार को पूर्व निर्धारित बैठक के बावजूद किसान संयुक्त मोर्चा ने दबाव की रणनीति अपनाई है। इसके तहत आगामी आंदोलन की रूपरेखा एक बार फिर घोषित कर दी गई है। संयुक्त किसान मोर्चा अपनी आगामी रणनीति के तहत छह जनवरी को किसान ट्रैक्टर मार्च निकालेगा, जबकि 15 जनवरी तक भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का घेराव करने का फैसला किया गया है। 23 जनवरी को सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर सभी राज्यों में राज्यपाल भवन तक मार्च किया जाएगा। इस बीच, केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने उम्मीद जताई कि प्रस्तावित बातचीत से समाधान निकल सकता है और कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन खत्म हो सकता है। उन्होंने कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों पर किसानों को भड़काने का भी आरोप लगाया। इसमें कुछ दम भी लगता है। क्योंकि किसान संगठनों को भड़काने वाले कुछ नेता और एनजीओ वार्ता की सफलता में बाधा बन सकते हैं। ऐसे लोग पिछली वार्ता में सरकार द्वारा दो प्रमुख मांगें मान लिए जाने को कमतर बताकर बातचीत में रोड़ा डालने की फिराक में हैं। इसके बावजूद सरकार हर हाल में सोमवार की चर्चा में समाधान तक पहुंचने की कोशिश में है।

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