हरिद्वार कुंभ की तैयारी शुरू, श्रद्धालुओं का होगा रजिस्ट्रेशन और एंटीजन टेस्ट

नई दिल्ली। हरिद्वार में दो माह बाद शुरू होने वाले कुंभ मेले को लेकर तैयारी जोरों पर चल रही है। कोरोना महामारी के कारण कुछ सख्त नियमों से भी सामना होगा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कुंभ मेला की तैयारियों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कई निर्देश दिए हैं। इसके तहत आने वाले श्रद्धालुओं का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और एंटीजन टेस्ट होगा। हर प्रवेश स्थल पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था होगी। कोविड-19 महामारी को लेकर प्रबंधों में सरकार किसी भी तरह की ढील नहीं देगी। उन्होंने 14 जनवरी को मकर संक्रांति के स्नान पर्व को लेकर भी अलग से दिशा-निर्देश जारी करने को कहा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर सड़क, पुलों, पार्किंग स्थलों आदि के निर्माण के काम शुरू कर दिए गए हैं। व्यवस्थाओं के लिए प्रमुख अखाड़ों के प्रमुखों से भी मशविरा किया जा रहा है।

बता दें कि हिंदू धर्म में कुंभ मेले का विशेष महत्व है। इसमें शाही स्नान का अलग महत्व होता है। अलग-अलग अखाड़ों से जुड़े संत और साधु आकर्षण का केंद्र होते हैं। हरिद्वार कुंभ के लिए इसकी तैयारी अंतिम चरण में है। कुंभ का आयोजन वैसे तो हर 12 साल बाद होता है, लेकिन इस बार यह 11वें साल में ही हो रहा है। पौराणिक, धार्मिक औस ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर 12 साल में कुंभ लगा करता है। चूंकि 2022 में गुरु, कुंभ राशि में नहीं होंगे, इसलिए इस बार 11वें साल में ही कुंभ हो रहा है। कुंभ के आयोजन में सूर्य और देवगुरु बृहस्पति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इन दोनों ही ग्रहों की गणना के आधार पर कुंभ की तिथि तय होती है। सनातन धर्म में कुंभ स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है। कहते हैं कि कुंभ स्नान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल जाती है। मोक्ष भी प्राप्त हो जाता है। कुंभ स्नान से पितृ भी शांत होते हैं और आर्शीवाद देते हैं। कुंभ के संबंध में समुद्र मंथन की कथा पौराणिक ग्रंथों में प्रचलित है। इसके अनुसार, एक बार महर्षि दुर्वासा के शाप से स्वर्ग का वैभव खत्म हो गया। तब सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए। विष्णुजी ने उन्हें असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने की सलाह दी। भगवान विष्णु ने बताया कि समुद्र मंथन से अमृत निकलेगा, अमृत पान से सभी देवता अमर हो जाएंगे।

कुंभ मेले में शाही स्नान

पहला शाही स्नान: 11 मार्च-शिवरात्रि

दूसरा शाही स्नान: 12 अप्रैल- सोमवती अमावस्या

तीसरा मुख्य शाही स्नान: 14 अप्रैल- मेष संक्रांति

चौथा शाही स्नान: 27 अप्रैल- वैशाख पूर्णिमा

6 अन्य प्रमुख स्नान

गुरुवार, 14 जनवरी- मकर संक्रांति

– गुरुवार, 11 फरवरी- मौनी अमावस्या

– मंगलवार, 16 फरवरी- बसंत पंचमी

– शनिवार, 27 फरवरी- माघ पूर्णिमा

– मंगलवार, 13 अप्रैल- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा

– बुधवार, 21 अप्रैल- रामनवमी।

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