किसानों ने निकाला ट्रैक्टर मार्च, सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

नई दिल्ली। नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों के विरोध-प्रदर्शन को 43 दिन हो चुके हैं। सरकार के साथ सात दौर तक की बातचीत विफल रहने के कारण गुरुवार को उन्होंने शीतलहर और बारिश के बीच दिल्ली की सभी सीमाओं पर टैक्टर रैली निकाली। 40 किसान संगठनों की अपील पर हजारों किसान ट्रैक्टर मार्च में शामिल रहे। इससे दिल्ली के कई रास्ते बंद हो गए। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को कोविड 19 महामारी को लेकर कहा कि किसानों का आंदोलन 2020 में दिल्‍ली के निजामुद्दीन इलाके में उत्‍पन्‍न हुई तबलीगी जमात जैसी स्थिति बना सकता है। उसने सरकार से पूछा कि क्‍या आंदोलन में किसान कोरोना संक्रमण के प्रसार के खिलाफ एहतियाती कदम उठा रहे हैं?

इससे पहले कड़ी सुरक्षा के बीच हजारों किसानों ने गुरुवार को तीन कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर से ट्रैक्टर रैली निकाली। भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहां) के प्रमुख जोगिंदर सिंह उग्राहां ने कहा कि 3500 से ज्यादा ट्रैक्टरों और ट्रॉलियों के साथ किसानों ने मार्च में हिस्सा लिया। किसान संगठनों ने कहा है कि 26 जनवरी को हरियाणा, पंजाब और उत्तरप्रदेश के विभिन्न हिस्सों से राष्ट्रीय राजधानी में आने वाले ट्रैक्टरों की प्रस्तावित परेड के पहले यह ‘रिहर्सल’ की तरह है। दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस के कर्मियों की भारी तैनाती के बीच ट्रैक्टर पर सवार किसानों ने कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे की ओर मार्च शुरू किया। भाकियू नेता राकेश टिकैत की अगुआई में ट्रैक्टर मार्च पलवल की तरफ से बढ़ा। संयुक्त किसान मोर्चा के एक वरिष्ठ सदस्य अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि अगर सरकार हमारी मांगें स्वीकार नहीं करेगी तो किसानों का प्रदर्शन आगे और तेज होगा।

तबलीगी जमात जैसी हो सकती है दिक्‍कत, सरकार बनाए गाइडलाइन

लगभग सवा महीने से चल रहे किसान आंदोलन पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। कहा है कि किसानों का आंदोलन 2020 में दिल्‍ली के निजामुद्दीन इलाके में उत्‍पन्‍न हुई तबलीगी जमात जैसी स्थिति बना सकता है। मुख्य न्यायाधीश (सीजएआई) एसए बोबडे की अध्‍यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्‍ली की सीमाओं पर किसानों के आंदोलन स्‍थलों पर कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं। अदालत ने केंद्र सरकार से कोर्ट को यह भी अवगत कराने को कहा है कि स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की गाइडलाइंस का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्‍या कदम उठाए गए हैं।
सीजेआई की अध्‍यक्षता वाली बेंच में जस्टिस एएस बोपन्‍ना और वी रामसुब्रमण्‍यम भी हैं। बेंच की ओर से जम्‍मू-कश्‍मीर की वकील सुप्रिया पंडित द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई हो रही थी। याचिकाकर्ता ने हजारों लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए खतरा उत्‍पन्‍न होने को लेकर केंद्र सरकार, दिल्‍ली सरकार और दिल्‍ली पुलिस पर सवाल उठाए हैं।

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