तारीख पर तारीखः किसानों से अब 15 को बैठक, सुप्रीम कोर्ट ही कर दे फैसला

नई दिल्ली। किसान नेताओं और सरकार के बीच शुक्रवार को आठवें दौर की बातचीत भी विफल हो गई। इस बैठक का भी कोई नतीजा नहीं निकला। इसलिए कि सरकार और किसान अपने-अपने रुख पर अड़े हैं। सरकार ने फिर साफ कर दिया कि वह कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी। वहीं किसान तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग नहीं छोड़ने पर अडिग हैं। रास्ता नहीं निकलते देख सरकार ने किसानों से कहा कि अब फैसला सुप्रीम कोर्ट करे तो बेहतर है। किसान संगठनों ने इस मसले को कोर्ट ले जाने से मना कर दिया। कहा-कानूनों की वापसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं। ऐसे में 15 जनवरी को फिर बैठक होगी। यह बैठक इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि 11 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन पर सुनवाई होनी है। ऐसे में इस सुनवाई के बाद जो बैठक होगी, उसमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर पड़ेगा।

विज्ञान भवन में शुक्रवार को हुई बैठक में 40 किसान संगठनों के अलावा केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल और सोम प्रकाश थे। बता दें कि इससे पहले सरकार और किसानों के बीच हो चुकी बिना किसी नतीजे के सात बार बैठक हो चुकी है। वैसे 30 दिसंबर को पराली जलाने और बिजली सब्सिडी को लेकर दोनों पक्षों में सहमति बनी थी। बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा- किसान यूनियन अगर कानून वापस लेने के अलावा कोई विकल्प देंगी, तो हम बात करने को तैयार हैं। लेकिन किसान नेताओं का कहना था कि इन कानूनों को वापस लिया जाए। लेकिन देश में बहुत से लोग इन कानूनों के पक्ष में हैं। कृषि मंत्री यह भी कहा कि हम लोकतांत्रिक देश के नागरिक हैं। हमारे लोकतंत्र में राज्यसभा और लोकसभा से कोई कानून पास होता है तो उसका विश्लेषण करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट का है। सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर सुनवाई भी हो रही है।

बैठक के बाद अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मुल्ला ने कहा कि हम कानून वापसी के अलावा कुछ और नहीं चाहते। हम कोर्ट नहीं जाएंगे। कानून वापस होने तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा- सरकान ने हमें कहा कि कोर्ट में चलो। हम यह नहीं कह रहे कि ये नए कृषि कानून गैरकानूनी है। हम इसके खिलाफ हैं। इन्हें सरकार वापस ले। हम कोर्ट में नहीं जाएंगे। इस बैठक के दौरान एक किसान के हाथों में पर्ची थी। उस पर लिखा था-‘हम या तो मरेंगे या जीतेंगे।’ इसी भावना के तहत किसानों ने फिर साफ कर दिया है कि कानून वापस लिए जाने तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। हन्नान मुल्ला ने यह भी कहा कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने खेती को राज्य सरकार का मुद्दा कहा हुआ है। इसलिए कायदे से राज्यों के कृषि मामलों में केंद्र को दखल नहीं देना चाहिए।

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