किसानों से बात बिगड़ी, अब सरकार के साथ अडानी-अंबानी भी निशाने पर

नई दिल्ली। नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों ने सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। केंद्र सरकार ने कृषि कानून में संशोधन प्रस्ताव दिया था। किसान संगठनों ने ना केवल केंद्र के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, बल्कि अब आंदोलन को और तेज करने के लिए नए कार्यक्रमों की घोषणा भी कर दी है। किसानों के निशाने पर अब केंद्र के साथ-साथ अडानी और अंबानी जैसे ग्रुप भी होंगे। इसके तहत 12 दिसंबर तक वे दिल्ली के सभी बॉर्डर सील कर देंगे। किसान नेताओं ने इसके साथ ही सभी टोल प्लाजा को उस दिन फ्री करने का भी एलान किया है। यह जानकारी किसान नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।

क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा कि जो सरकार की तरफ से प्रस्ताव आया है, उसे हम पूरी तरह से रद्द करते हैं। बता दें कि मंगलवार की रात गृह मंत्री अमित शाह के साथ बातचीत के आधार पर सरकार ने बुधवार को नौ सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था। सरकार ने नए कानूनों को वापस लेने की मांग को खारिज करते हुए कानून में संशोधन की बात कही थी। प्रस्ताव पर दिल्ली-हरियाणा के बीच सिंधु बॉर्डर पर किसान नेताओं की बैठक हुई। इसमें सरकारी प्रस्तावों को खारिज करते हुए कई फैसले लिए गए। इस बार किसान दिल्ली-उत्तर प्रदेश हाईवे और राजस्थान के हाईवे को ठप करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा दिल्ली की नाकेबंदी की जाएगी। किसान संगठनों ने कहा है कि अगर सरकार इस जिद पर अड़ी हुई है कि वह कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी, तो हम भी सरकार को बख्शने के मूड में नहीं है। यह संघर्ष कृषि कानून वापस लिए जाने जाने तक जारी रहेगा।

किसानों ने यह भी कहा कि 14 दिसंबर को देश भर में एक बार फिर से धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही साथ अडानी और अंबानी जैसे ग्रुप के मॉल और इनके दफ्तरों को भी घेरा जा जाएगा। भाजपा के नेताओं और मंत्रियों का बायकाट किया जाएगा। साथ ही जियो मोबाइल का बायकाट करने की भी घोषणा की गई। इतना ही नहीं, किसान जियो मोबाइल के नंबर को दूसरे मोबाइल कंपनी में पोर्ट कराने के लिए अभियान चलाएंगे। किसान संगठनों का गुस्सा अडानी और अंबानी ग्रुप पर इसलिए है, क्योंकि उनका आरोप है कि केंद्र सरकार इन दोनों कॉरपोरेट घरानों के प्रभाव में काम कर रही है। नए कृषि कानून इन्हीं कॉरपोरेट घरानों के प्रभाव में लागू किए गए हैं, जिसमें किसानों की अनदेखी हुई है।

किसान नेताओं के फैसले-

-12 दिसंबर को पूरे देश में टोल प्लाजा फ्री करेंगे।

-12 दिसंबर तक कभी भी दिल्ली-जयपुर और दिल्ली-आगरा हाईवे बंद किया जाएगा।

-जियो के सभी प्रोडक्ट का बहिष्कार करेंगे।

-13 दिसंबर को पूरे देश में धरना प्रदर्शन करेंगे

-14 दिसंबर के बाद से अनिश्चितकालीन प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक तीनों कानून वापस नहीं लिए जाते।

– भाजपा के मंत्रियों का घेराव होगा।

– एक के बाद एक दिल्ली की सड़कें जाम की जाएंगी।

ऐसा था सरकार का प्रस्ताव-

अनुबंधों का भी होगा रजिस्ट्रेशन- किसानों मुद्दा उठाया था कि कृषि अनुबंधों के पंजीकरण की व्यवस्था नए कानून में नहीं है। केंद्र कहा है कि जब तक राज्य सरकारें रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था नहीं करतीं, तब तक एसडीएम को लिखित हस्ताक्षरित करार की प्रतिलिपि 30 दिन के भीतर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।

निजी मंडियों के रजिस्ट्रेशन की होगी व्यवस्था- निजी मंडियों के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था संशोधन के जरिए रखने का प्रस्ताव दिया गया। किसानों को आपत्ति थी कि नए कानून से स्थापित मंडियां कमजोर होंगी और किसान निजी मंडियों के चंगुल में फंस जाएंगे।

व्यापारियों को कराना होगा पंजीकरण-सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह राज्य सरकारों को अधिकार देगी, ताकि किसानों के हित में फैसला लिया जा सके। साथ ही व्यापारियों पंजीकरण कराना ही होगा।

भूमि की कुर्की नहीं हो सकेगी-किसानों का मुद्दा था कि उनकी भूमि की कुर्की हो सकेगी। लेकिन सरकार का कहना है कि किसान की भूमि की कुर्की नहीं की जा सकती।

जमीन नहीं कब्जा सकेंगे उद्योगपति- किसानों डर है कि उनकी भूमि उद्योगपति कब्जा कर लेंगे, जिसका समाधान सरकार ने प्रस्ताव में दिया है।

अदालत जाने का मिलेगा अवसर-किसानों की मांग थी कि कृषि कानूनों में किसानों को विवाद के समय कोर्ट जाने का अधिकार नहीं दिया गया है, जो दिया जाना चाहिए। सरकार इस पर राजी हो गई है।

बिजली संशोधन बिल नहीं लाएगी-सरकार ने प्रस्ताव में कहा है कि वह बिजली संशोधन बिल-2020 नहीं लाएगी। यह किसानों की प्रमुख मांगों में से एक है।

एमएसपी पर सिर्फ लिखित आश्वासन-सरकार ने किसानों के सबसे बड़े मुद्दे न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर कानून लाने की जगह उस पर लिखित में आश्वासन देने की बात कही है।

विपक्षी नेता राष्ट्रपति से मिले-

इस बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार समेत विपक्ष के पांच नेता बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिले। इनमें माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीआई के डी. राजा और डीएमके के एलंगोवन भी थे। राहुल गांधी ने कहा- किसान ने देश की नींव रखी है। वो दिनभर इस देश के लिए काम करता है। ये जो बिल पास किए गए हैं, वह किसान विरोधी हैं। प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि ये बिल किसानों के हित के लिए है। सवाल ये है कि किसान इतना गुस्सा क्यों है। इन बिलों का लक्ष्य मोदीजी के मित्रों को एग्रीकल्चर सौंपने का है। किसानों की शक्ति के आगे कोई नहीं टिक पाएगा। हिंदुस्तान का किसान डरेगा नहीं, हटेगा नहीं, जब-तक ये बिल रद्द नहीं कर दिया जाता।

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