अनशन पर रहे अन्नदाता, सरकार को किसानों का इंतजार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से लाए गए नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन का 19वां दिन सोमवार को पूरा हो गया। किसान दिल्ली की तमाम सीमाओं पर एक दिन का अनशन किया। इस बीच, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, बिहार और हरियाणा के 10 किसान संगठनों ने कृषि कानूनों का समर्थन किया है। आंदोलन कर रहे किसानों के लिए तोमर ने कहा कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं। किसानों के साथ वार्ता की अगली तारीख तय करने के लिए सरकार उनसे संपर्क में है। बता दें कि केंद्र और किसान नेताओं के बीच अब तक पांच दौर की बातचीत बेनतीजा रही हैं। सरकार ने किसान संघों को नौ सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को जारी रखने का लिखित आश्वासन भी था। लेकिन किसान यूनियनों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और कानूनों को रद्द करने की मांग पर अडिग हैं। उधर, किसानों को दिल्ली की सीमाओं से हटाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 16 दिसंबर को सुनवाई करेगा।

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दिन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की। गतिरोध समाप्त करने के तरीके पर चर्चा की। बाद में उन्होंने ऑल इंडिया किसान समन्वय समिति (एआईकेसीसी) के नेतृत्व वाले किसानों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसने किसान कानूनों को समर्थन दिया है। कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने एक बार फिर कहा है कानून वापस नहीं लिए जाएंगे। हां, कुछ जोड़ना है तो उस पर बात होगी। पिछले दो सप्ताह में कानूनों को समर्थन देने वाला यह चौथा समूह है। उधर, किसान नेता बूटा सिंह ने कहा कि इस किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार हर हथकंडा अपना रही है। हमें कभी आतंकी तो कभी नक्सल कहती है। कभी पाकिस्तान तो कभी चीन का एजेंट तक कहती है। सरकार किसानों में फूट डालना चाहती है, लेकिन हम एकजुट हैं और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि हम छह महीने से लेकर एक साल तक का राशन लेकर आए हैं। जब तक कानून वापस नहीं होगा, तब तक नहीं जाएंगे।

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