बंद होंगे कयर बोर्ड के एक तिहाई शोरूम

दरभंगा। विदेशों में भले ही भारतीय हैंडीक्राफ्ट की बड़ी मांग हो भारत में हथकरघा उद्योग के बल पर चलने वाले कयर बोर्ड की हालत खराब है। केंद्रीय लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कयर बोर्ड के एक तिहाई से अधिक शोरूम बंद किए जा रहे हैं। इसके लिए कोरोना-जनित मंदी नहीं बल्कि कयर बोर्ड का कुप्रबंधन जिम्मेदार है।
हालत यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी और उनके गृह प्रदेश गुजरात की राजधानी अहमदाबाद स्थित कयर बोर्ड के शोरूम में न तो कोई सेल्समैन है और ना ही मैनेजर। ये दो ही नहीं इनके जैसे कई शोरूम काफी समय से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों यानी चपरासियों के हवाले हैं। सबसे बड़े समुद्र तट वाले प्रदेश गुजरात में औद्योगिक विकास के लिए बोर्ड का कोई कर्मचारी ही नहीं है।
पिछले 17 वर्षों से कयर बोर्ड में कोई स्थाई मार्केटिंग डायरेक्टर नहीं है। यही वजह है कि शोरूम की बिक्री 22 करोड़ से घटकर आठ करोड़ रह गई है। इसीलिए बोर्ड अपने 29 में से 10 शोरूम बंद कर रहा है। इनमें दिल्ली के नेहरू प्लेस, देहरादून, जयपुर, कानपुर, इलाहाबाद, इंदौर, अगरतला, गंगटोक, पालघाट और मदुरई स्थित शोरूम शामिल हैं।
घाटे में तो वाराणसी और अहमदाबाद के शोरूम भी हैं लेकिन प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र और गृह प्रदेश में होने की वजह से वह बंद होने से बच गए हैं। जो बच भी गए हैं उन शोरूम में सामान ही नहीं है क्योंकि बोर्ड द्वारा स्वीकृत विक्रेताओं से सामान खरीदने पर सभी शोरूम पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और बोर्ड स्वयं खरीद कर उन्हें सामान दे नहीं रहा है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ल, कौशांबी से सांसद विनोद सोनकर और राज्यसभा सदस्य डॉ अशोक वाजपेयी सहित लगभग आधा दर्जन सांसदों ने केंद्रीय लघु, सूक्ष्म एवं मझोले उद्योग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर कयर बोर्ड की दशा सुधारने का आग्रह किया है। उनका कहना है कयर बोर्ड लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है जिनमें अधिकतर महिलाएं हैं। ऐसे में सरकार को मार्केटिंग डायरेक्टर के लिए किसी उचित व्यक्ति का चयन कर बिक्री बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए ना कि शोरूम बंद करने पर।

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