महाराष्ट्र में बिना इजाजत सीबीआई को नो एंट्री

नई दिल्ली। महाराष्ट्र सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को दी गई आम सहमति वापस ले ली है। इससे महाराष्ट्र में किसी भी जांच को शुरू करने से पहले सीबीआई को राज्य सरकार की इजाजत लेनी होगी। यह एक राजनीतिक फैसला है। इससे पहले भी केंद्र सरकार पर हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए कई राज्य ऐसा फैसला ले चुके हैं। इन राज्यों में राजस्थान, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश जैसे गैर भाजपा शासित राज्य हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट का आदेश होने पर राज्य सरकारों की अनुमति की जरूरत नहीं होती। इसलिए इस फैसले से सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जांच प्रभावित नहीं होगी।

महाराष्ट्र सरकार के आदेश के मुताबिक, राज्य में सीबीआई को अब शक्तियों और न्यायक्षेत्र के इस्तेमाल के लिए आम सहमति नहीं होगी। महाराष्ट्र ने यह सहमति 1989 को जारी एक आदेश के तहत दी थी जिसे वापस ले लिया गया है। इसके बाद सीबीआई को किसी भी मामले की जांच के लिए अब उद्धव ठाकरे सरकार की अनुमति लेनी पड़ेगी। इस कदम से केंद्र और राज्य के बीच टकराव बढ़ने की आशंका है। महाराष्ट्र सरकार ने यह कदम दरअसल टीआरपी घोटाले को लेकर उत्तर प्रदेश में मामला दर्ज होने के बाद उठाया है। शिवसेना नेता संजय राउत ने इस पूरे मामले को लेकर सीबीआई पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्रीय एजेंसी अब छोटे-छोटे मामलों में भी घुसने लगी है। बता दें कि लखनऊ में गोल्डन रैबिट कम्युनिकेशंस ने टीआरपी घोटाले को लेकर एक शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद यूपी पुलिस ने मामला दर्ज किया, लेकिन यूपी सरकार ने सीबीआई से अपील करते हुए कहा कि वह इस मामले को देखे। अब सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है। महाराष्ट्र सरकार ने इसे रिपब्लिक टीवी और इसके मुखिया अर्णब गोस्वामी को बचाने की मुहिम के तौर पर ले रही है। आरोप है कि अर्णब गोस्वामी आए दिन सुशांत सिंह मौत मामले से लेकर पालघर हत्याकांड तक की एकतरफा रिपोर्टिंग कर राज्य सरकार को बदनाम करने में लगे हुए हैं।

पिछले दिनों सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले की जांच को लेकर भी मुंबई पुलिस और सीबीआई आमने-सामने थी। इस मामले की जांच मुंबई पुलिस ने शुरू की थी, लेकिन सुशांत के पिता द्वारा पटना में एफआईआर के बाद मामला बिहार पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दिया गया। इसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने मुंबई पहुंच कर मामले की जांच की। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मुंबई पुलिस पर कई बार सवाल खड़े किए गए थे। इस वजह से उसने आम सहमति यानी जनरल कंसेंट वापस ले ली, ताकि मुंबई पुलिस इस मामले की जांच करती रहे।

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