फांसी के फंदे से झूलते मिले सीबीआई के पूर्व निदेशक

नई दिल्ली। मणिपुर, नगालैंड के पूर्व राज्यपाल और सीबीआई के पूर्व निदेशक अश्विनी कुमार ने की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। 70 साल के अश्विनी कुमार का शव शिमला स्थित घर में फांसी के फंदे पर झूलता हुआ मिला। शिमला के एसपी मोहित चावला ने उनके निधन की पुष्टि की है। वैसे पुलिस के मुताबिक, अश्विनी ने आत्महत्या की है या कुछ और वजह है, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। हालांकि मौके से सुसाइड नोट मिला है। इसमें लिखा गया है कि जिंदगी से तंग आकर अगली यात्रा पर निकल रहा हूं।अश्विनी कुमार 1973 बैच के आईपीएस अफसर थे। उनका जन्म सिरमौर जिला के नाहन में हुआ था। वह 2006 से 2008 तक हिमाचल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रहे। अगस्त 2008 से नवंबर 2010 के बीच वह सीबीआई के निदेशक रहे थे। अश्विनी कुमार सीबीआई के पहले ऐसे प्रमुख रहे, जिन्हें बाद में राज्यपाल बनाया गया था। मार्च, 2013 में उन्हें नगालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। हालांकि 2014 में उन्होंने त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद वह शिमला में एक निजी यूनिवर्सिटी के कुलपति भी रहे। में हिमाचल प्रदेश पुलिस के डीजीपी के रूप में उन्होंने पुलिस प्रशासन में कई सुधार किए थे। हिमाचल पुलिस के डिजिटलीकरण और स्थानीय स्तर पर थानों में कम्प्यूटर के उपयोग की शुरुआत उनके कार्यकाल में ही हुई थी। उन्हीं के कार्यकाल में शिकायतों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जैसी व्यवस्था शुरू हुई। इससे दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों में रहने वालों को थाने तक नहीं आना पड़ता। बताया जाता है कि कोरोना लॉकडाउन के दौरान पत्नी और बेटे के साथ वह मुंबई में थे। हाल ही में लौटे थे।

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