आत्मनिर्भर भारत का नया पैकेज, राहत ही राहत

नई दिल्ली। कोरोना संकट और लॉकडाउन से बेपटरी हुई अर्थव्यवस्था को रास्ते पर लाने के लिए केंद्र सरकार ने गुरुवार को 2.65 करोड़ रुपये के एक और राहत पैकेज की घोषणा की। इस मौके पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ‘आत्मनिर्भर भारत रोज़गार योजना’ शुरू करने की घोषणा की। यह योजना एक अक्टूबर से लागू होगी। इसके तहत अगर लॉकडाउन में नौकरी गई हो तो अब दो साल तक केंद्र सरकार पीएफ की राशि भरेगी। इसके लिए कंपनी को कुछ शर्तों का पालन करना होगा। इसके साथ ही वित्त मंत्री अर्थव्यवस्था के मजबूती से वापसी का दावा किया। कहा कि देश में लगातार निवेश बढ़ रहा है। शेयर बाजार फिलहाल ऐतिहासिक रूप से उच्चतम स्तर पर है। विदेशी मुद्रा भंडार भी उच्चतम स्तर पर है। इतना ही नहीं, हमारी अर्थव्यवस्था को लेकर मूडीज की रैंकिंग में भी सुधार हुआ है।

आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना से संगठित क्षेत्र में रोजगार को बल मिलेगा। पंजीकृत ईपीएफओ प्रतिष्ठान से जुड़ने वाले कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। जो पहले ईपीएफओ से नहीं जुड़े थे या जिनकी नौकरी एक मार्च से 30 सितंबर के बीच चली गई थी, उन्हें भी इस योजना का फायदा मिलेगा। सरकार दो साल तक एक हजार कर्मचारियों वाली संस्थाओं को नई भर्ती वाले कर्मचारियों के पीएफ का पूरा 24 प्रतिशत हिस्सा सब्सिडी के तौर पर देगी। एक हजार से ज्यादा कर्मचारियों वाले संस्थान मे नए कर्मचारी के 12 प्रतिशत पीएफ योगदान पर सरकार दो साल तक सब्सिडी देगी। इसके साथ ही सरकार ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) की अवधि भी बढ़ा दी है। अब इसका लाभ अगले साल 31 मार्च तक मिल सकेगा। उनके मुताबिक, आत्मनिर्भर भारत के तहत ईसीएलजीस स्कीम के अंतर्गत 61 लाख लोगों को लाभ मिला है।

वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि पीएम शहरी आवास योजना के लिए 18 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान हुआ है। इससे कुल 30 लाख मकानों को फायदा मिलेगा। यह राशि बजट में घोषित आठ हजार करोड़ रुपये से अतिरिक्त होगी। इससे 78 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि कामत समिति की सिफारिश के आधार पर 26 दबावग्रस्त क्षेत्रों की पहचान की गई है। इसमें स्वास्थ्य क्षेत्र भी है। इन क्षेत्रों के लिए ईसीएलजीएस स्कीम 2.0 शुरू की जा रही है। एमएसएमई सेक्टर को भी इसका फायदा मिलेगा। इसमें मूलधन चुकाने के लिए पांच साल का समय दिया गया है। इसमें कर्जधारक कंपनियों को एक साल तक 50 करोड़ से 500 करोड़ रुपये तक का मोरेटोरियम दिया जाएगा। यह योजना 31 मार्च तक लागू रहेगी। 10 क्षेत्रों के लिए 1.46 लाख करोड़ रुपये की प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव योजना शुरू की गई है। इससे रोजगार और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। पहले योजना तीन क्षेत्रों के लिए थी।

ये हैं अन्य बड़ी घोषणाएं-

-निर्माण और बुनियादी ढांचा सेक्टर की कंपनियों को अब कॉन्ट्रैक्ट के लिए परफॉर्मेंस सिक्योरिटी के तौर पर केवल तीन प्रतिशत की रकम रखनी होगी। पहले पांच से 10 प्रतिशत रखनी पड़ती थी। यह राहत अगले साल 31 दिसंबर तक जारी रहेगी।

-पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत 10 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था। इसका इस्तेमाल मनरेगा या ग्राम सड़क योजना के लिए होगा।

-किसानों को उर्वरक सब्सिडी देने के लिए 65 हजार करोड़ रुपये।

-निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक्जिम बैंक को लाइन ऑफ क्रेडिट मिलेगा।

-कोविड वैक्सीन के शोध के लिए कोविड सुरक्षा मिशन के तहत डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी को 900 करोड़ रुपये आवंटित।

– प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा के तहत 1681 करोड़ रुपये आवंटित। नाबार्ड के जरिये 25 हजार करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी आवंटित की गई है।

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