हाथरस कांड में फोन ने पकड़ी नई बात, आरोपी संग संपर्क में था पीड़ित परिवार

पलक, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए वीभत्स कांड में नए खुलासे से नया मोड़ आ गया है। जांच से पता चला है कि पीड़ित परिवार और मुख्य आरोपी के बीच फोन पर संपर्क पर लगातार बातचीत होती थी। पिछले साल अक्तूबर से मुख्य आरोपी संदीप और पीड़ित परिवार बीच करीब 104 बार फोन पर बात हुई। यहखुलासा आरोपी और पीड़ित परिवार के कॉल रिकॉर्ड को खंगालने से हुआ। गजब यह कि ज्यादातर कॉल चंदपा क्षेत्र से की गई है, जो पीड़िता के गांव से सिर्फ दो किलोमीटर की दूरी पर है। पीड़ित परिवार ने 62 बार फोन किया, तो आरोपी संदीप की ओर से 42 फोन किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी को फोन पीड़िता का भाई करता था।

इस बीच, उत्तर प्रदेश के हाथरस कांड के बाद जातीय हिंसा भड़काने की साजिश में चार लोगों को पकड़ा गया है। ये हाथरस दुष्कर्म मामले के बहाने पूरे उत्तर प्रदेश में जातीय हिंसा भड़काने की साजिश रच रहे थे। ताकि चुनाव वाले बिहार समते अन्य राज्यों तक विरोध की चिंगारी फैलाई जा सके। मथुरा में गिरफ्तार किए गए चारों के पास से लैपटॉप और अन्य सामान बरामद हुए हैं। चारों दिल्ली दंगे में भी आरोपी पीपुल्स फ्रंट ऑफ इंडिया (पीआईएफ) के सदस्य बताए गए हैं। उधर, मंगलवार को यूपी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया गया। इसमें बताया कि रात में पीड़िता का अंतिम संस्कार परिवार की सहमति से ही हुआ था। इसलिए कि दिन में हिंसा भड़कने की आशंका थी। सूचना मिली थी कि इस मामले को जातिवाद का मुद्दा बनाकर अंतिम संस्कार में लाखों प्रदर्शनकारी जुट सकते हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच के साथ-साथ उसकी निगरानी कोर्ट से कराने की मांग पर याचिका लगाई गई है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की बेंच ने सुनवाई एक हफ्ते के लिए टाल दी है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के मुताबिक, हाथरस केस को दिल्ली ट्रांसकर करना चाहए, क्योंकि उत्तर प्रदेश पुलिस-प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ सही कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने जल्दबाजी में रात में ही शव जला दिया और कहा कि परिवार की सहमति से ऐसा किया। लेकिन, यह सच नहीं है। पुलिसवालों ने खुद चिता को आग लगाई और मीडिया को भी नहीं आने दिया गया। गौरतलब है कि हाथरस जिले के चंदपा इलाके के बुलगढ़ी गांव में 14 सितंबर को चार लोगों ने दलित युवती से गैंगरेप किया था। आरोपियों ने उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी थी। जीभ भी काट दी थी। दिल्ली में इलाज के दौरान 29 सितंबर को पीड़िता की मौत हो गई। इस मामले में चारों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं। हालांकि, पुलिस का दावा है कि दुष्कर्म नहीं हुआ था। सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश कर चुकी है। लापरवाही के आरोप में एसपी समेत पांच पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके हैं।

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