बीएचयू मैथिली अध्ययन केंद्र में बनेंगी पांच शोध पीठ

आर्यांश, नई दिल्ली। वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में मैथिली संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खुले अध्ययन केंद्र में पांच नई शोध पीठ बनाने की तैयारी चल रही है। ये पीठ होंगी- माता सीता, महाकवि विद्यापति, पंडित मंडन मिश्र, दरभंगा महाराज और मधुबनी पेंटिंग का काम करने वालों पर। मैथिली अध्ययन केंद्र में डिग्री, डिप्लोमा कोर्स के साथ ही शोध कार्य भी चलाए जाएंगे। इसके तहत पांडुलिपियों, मधुबनी पेंटिंग समेत अन्य सामग्रियां मंगाने के लिए जल्द ही जर्मनी, कनाडा और जापान समेत देश-विदेश के विश्वविद्यालयों से समझौता किया जाएगा। इस केंद्र की सह समन्वयक डॉ. वंदना झा ने बताया कि एक साल यानी दो सेमेस्टर का डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स होगा। इसके अलावा समय-समय पर कार्यशालाओं का भी आयोजन होगा। बता दें कि पिछले दिनों बीएचयू प्रशासन की ओर से बनाए गए मैथिली अध्ययन केंद्र के समन्वयक कला संकाय के प्रमुख डॉ. विजय बहादुर हैं।

इस केंद्र की सहसमन्वयक और वसंत महिला कॉलेज, राजघाट की शिक्षक डॉ. वंदना झा ने बताया कि मैथिली अध्ययन केंद्र कला संकाय परिसर में वहां बनेगा, जहां अभी अभिनव भारत अध्ययन केंद्र चल रहा था। उनके मुताबिक, प्रस्तावित पांच पीठों में छात्र-छात्राओं को मैथिल संस्कृति के साथ-साथ महापुरुषों की जीवनी के बारे में जानने का भी मौका मिलेगा। साथ ही कला, संस्कृति और संगीत को बढ़ावा देने के योगदान से जुड़े विषयों पर शोध का अवसर भी मिलेगा। इसके लिए यूजीसी, शिक्षा मंत्रालय, बिहार और झारखंड सरकारों से अनुदान के लिए पत्र भेजन की तैयारी चल रही है। फिलहाल, कला संकाय प्रमुख के निर्देशन में चलने वाले इस केंद्र में अगले सत्र से शोध और डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स चलाने संबंधी तैयारी जोर-शोर से चल रही है।

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