कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा का निधन

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा का निधन हो गया है। वह 93 साल के थे। वह कुछ हफ्ते पहले ही कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें कभी ना भूलने वाला नेता बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम नेताओं ने उन्हें याद करते हुए शोक जताया है।
राजस्थान के जोधपुर में ब्रिटिश इंडिया के जमाने में जन्मे मोतीलाल वोरा ने छत्तीसगढ़ के रायपुर और कलकत्ता से उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद कई अखबारों के साथ काम किया था। वह लगभग 50 वर्षों से कांग्रेस के साथ संगठन और सरकारों में जुड़े रहे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके वोरा का राजनीतिक सफर 1960 के दशक में शुरू हुआ था। शुरुआत में वह समाजवादी थे। कांग्रेस में वह 1970 में आए और फिर पार्टी के साथ-साथ राज्य सरकार में उच्च पदों पर रहने के बाद राज्यसभा तक पहुंचे। वह अर्जुन सिंह सरकार में मंत्री रहने के अलावा उत्तर प्रदेश के राज्यपाल भी रहे। वोरा के बेटे अरुण वोरा भी राजनीति में हैं और छत्तीसगढ़ के दुर्ग से तीन बार विधायक का चुनाव जीत चुके हैं। 1983 में इंदिरा गांधी सरकार में वोरा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1985 में वोरा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभाला। इसके बाद राजीव गांधी सरकार में भी वह शामिल हुए। तब उन्हें राज्यसभा के सदस्य के तौर पर कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। कांग्रेस में वोरा ऐसे नेता थे जिन्होंने दो चुनाव पहले ही पार्टी में खुलकर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाने की वकालत की थी। उन्होंने राहुल को पार्टी की कमान पूरी तरह सौंपने का भी समर्थन किया था। हालांकि पार्टी ने मनमोहन सिंह को ही दो बार प्रधानमंत्री बनाया।
मोतीलाल वोरा के साथ विवाद भी जुड़ा रहा। नेशनल हेराल्ड केस में जिन तीन संस्थाओं का नाम आया, उन तीनों में ही वोरा महत्वपूर्ण पदों पर रहे। एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड यानी एजेएल में 22 मार्च 2002 को वोरा चेयरमैन और एमडी बने थे। नेशनल हेराल्ड केस में आरोपी के तौर पर शामिल अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में वोरा कोषाध्यक्ष का पद संभाल चुके थे। इस केस में तीसरी संस्था यंग इंडियन का नाम आया था। इसमें भी वोरा 12 फीसदी के शेयर होल्डर रहे।

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